घरों के नक़्शे और नमाज़
 



घरों के नक़्शे और नमाज़


शहरो को बसाने और घरों को बनाने के लिए नक़्शे बनाते वक़्त नमाज़ और क़िबले के मसाइल को भी ध्यान में रखना चाहिए। क्योंकि सूरए युनुस की आयत न.87 मे इरशाद होता है कि अपने घरों को क़िबला क़रार दो और नमाज़ को क़ाइम करो। (क़िबला क़रार दो यानी क़िबला रुख बनाओ)

हमने मूसा व हारून से कहा कि बनी इस्राईल के रहने की मुश्किलात को दूर करो। अपनी क़ौम के रहने के लिए घर बनाओ और उनको बिखराओ व दरबदरी से बचाओ। घर का मालिक बनने के बाद उनके अन्दर वतन और हिफ़ाज़ते वतन का जज़बा पैदा होगा। लेकिन ध्यान रहे कि शहर बसाते वक़्त अपने घरों को क़िबला क़रार दो ताकि नमाज़ के क़ाइम करने मे कोई परेशानी न हो।

ईरान के वह शहर जिनकी नक़्क़ाशी शेख बहाई ने की हैं उनमे सड़कों और गलियों को इस तरह बनाया गया है कि वह सीधी क़िबले की सिम्त हैं। (क़िबले के दूसरे मअना भी हैं मगर नमाज़ के हुक्म को ध्यान मे रखते हुए यही माना सबसे अच्छे हैं।