ख़त्बा-137
 



ख़त्बा-137



[ शूरा के मौक़े पर फ़रमाया ] ? मुझ से पहले तबलीग़े हक़ (धर्म का प्रचार) सिलए रहिम (रिश्तेदारों से सदव्यावहार) और जूदो करम (दान व दया) की तरफ़ किसी ने भी तेज़ी से क़दम नहीं बढ़ाया। लिहाज़ा (अस्तु) तुम मेरे क़ौल (वचन) को सुनो और मेरी बातों को याद रखो, कि तुम जल्द ही देख लोगे कि इस दिन के बाद से फ़िलाफ़त के लिये तलवारें सौंत ली जायेंगी, और अहदो पैमान (प्रतिज्ञा व संकल्प) तोड़ कर रख दिये जायेंगे। यहां तक कि कुछ लोग गुमराह लोगो के पेशवा (नेता) बन के खडे़ होंगे और कुछ जाहिलों के पैरोंकार हो जायेंगा।