ख़ुत्बा-136
 



ख़ुत्बा-136




[ इसमें आने वाले फ़ित्नों (उपद्रवों) और हंगामों की तरफ़ इशारा किया है ]

वह ख्वाहिशों (इच्छाओं) को हिदायत (अनुदेश) की तरफ़ मोड़ेगा, जब कि लोगों ने हिदायत को ख्वाहिशों की तरफ़ मोड़ दिया होगा, और उन की रायों को क़ुरआन की तरफ़ फेरेगा, जब कि उन्हों ने क़ुरआन को तोड़ मरोड़ कर क़ियास व राय के ढर्रे पर लगा लिया होगा।

[इस ख़ुत्बे का एक जुज़ (अंश) यह है]

यहां तक नौबत पहुंचेगी कि जंग अपने पैरों पर खड़ी हो जायेगी दांत निकाले हुए, और थन भरे हुए जिन का दूध शीरीं व ख़ुशगवार (मीठा व मधुर) मालूम होगा। लेकिन उस का अंजाम (परिणाम) तल्ख़ व नागवार (कड़वा एंव अप्रिय) होगा। हां कल ! और यह कल पहुत नज़्दीक (निकट) है, कि ऐसी चीज़ों को लेकर आ जाए जिन्हें तुम अभी तक नहीं पहचानते। हाकिम व वाली (शासक व स्वामी) जो इस जमाअत (समूह) में से नहीं होगा, तमाम हुक्मरानों से उन की बद किर्दारियां (दुराचारों) की वजह से मुवाख़िज़ा (पकड़) करेगा, और ज़मीन (पृथ्वी) उस के सामने अपने ख़ज़ाने उंडेल देगी और अपनी कुंजियां बसहूलत (सरलता से) उसके आगे डाल देगी। चुनांचे वह तुम्हें दिखायेगी कि हक़ व अदालत (सत्य एवं न्याय) की रविश (पद्धति) क्या होती है, और वह दम तोड़ चुकने वाली किताब व सुन्नत को फिर से ज़िन्दा करेगा।

[ इसी ख़ुत्बे का एक जुज़ (अंश) यह है ]

गोया (जैसे) यह मंज़र (दृश्य) मैं अपनी आंखों से देख रहा हूं कि वह दाइये बातिल (अधर्म की और आमंत्रित करने वाला) शाम में खड़ा हुआ लल्कार रहा है और कूफ़े के अत्राफ़ (चारों दिशाओं) में अपने झंण्डे लहरा रहा है, और काट खाने वाली ऊंटनी की तरह उस पर हमला करने के लिये झुका हुआ है, और उस ने ज़मीन (पृथ्वी) पर सरों का फ़र्श बिछा दिया है। उस का मुह फ़ाड़ खाने के लिये, ख़ुल चुका है, और ज़मीन में उस की पामालियां बहुत सख्त (कठीन) हो चुकी हैं। वह दूर दूर तक बढ़ जाने वाला है। बख़ुदा ! वह तुम्हें अतराफ़े ज़मीन (पृथ्वी के चारों दिशाओं) में बिखेर देगा। यहां तक कि तुम में से कुछ थोड़े ही बचेंगे जैसे आंख में सुर्मा। तुम इसी सरासीमगी के आलम में रहोगे, यहां तक कि अर्बों की अक़्ले फिर अपने ठिकाने पर आ जायें। तुम मज़बूत तरीक़ों, रौशन निशानियों और इसी क़रीब के अह्द पर जमे रहो कि जिस में नुबुव्वत के पायदार आसान हैं और तुम्हें मालूम होना चाहिये कि शैतान अपने क़दम बक़दम चलाने के लिये राहें आसान करता रहता है।

अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) की यह पेशीन गोई (भविष्यवाणी) हज़रते हुज्जत (अ.स.) के ज़ुहूर के सिलसिले में है।

यह अब्दुल मलिक इब्ने मर्वान की तरफ़ इशारा है कि जो मर्वान के बाद शाम में बर सरे इक़तिदार आया और मस्अद के मुक़ाबिले में मुख्तार इब्ने अबी उबैदए सक़फ़ी के मारे जाने पर यह अपना पर्चम (पताका) लेहराता हुआ इराक़ की तरफ़ बढ़ा और अत्राफ़े कूफ़ा में दैरे जासेलीक़ के नज़्दीक माक़ामे मस्कन पर मस्अब की फ़ौजों से नबर्द आज़मा हुआ, और उसे शिकस्त देने के बाद फ़त्ह मन्दाना (विजयी के रुप में) कूफ़े में दाखिल हुआ, और वहां के बाशिन्दों (वासियों) से बैअत ली और फिर हज्जाज इब्ने सूसुफ़े सक़फ़ी को अब्दुल्लाह इब्ने ज़ुबैर से लड़ने के लिये मक्का रवाना किया। चुनांचे उस ने मक्के का मुहासिरा (घिराव) कर के खानए कअबा पर संगबारी (पत्थर बरसाए) और हज़ारों बेगुनाहों का खून पानी की तरह बहाया। इब्ने ज़ुबैर को क़त्ल कर के उस की लाश को सूली पर लटका दिया और ख़ल्क़े ख़ुदा पर ऐसे ऐसे ज़ुल्म ढ़ाए कि जिन से रोंगटे खड़े हो जाते हैं।