ख़ुत्बा-142
 



ख़ुत्बा-142




अल्लाह सुब्हानहू ने अपने रसूलों को वह्ई के इमतियाज़ात (अन्तरों) के साथ भेजा, और उन्हें मख्लूक़ पर अपनी हुज्जत ठहराया ताकि वह यह उज़्र न कर सकें कि उन पर हुज्जत तमाम नहीं हुई। चुनांचे अल्लाह ने उन्हें सच्ची ज़बानों से राहे हक़ की दअवत दी (यूं तो) अल्लाह मख्लूक़ात को अच्छी तरह जानता बूझता है और लोगों के उन राज़ों और भेदों से कि जिन्हें वह छिपा कर रखते हैं, बेख़बर नहीं। फिर यह हुक्म व अहकाम इस लिये दिये हैं कि वह उन लोगों को आज़माकर यह ज़ाहिर कर दे कि उन में अअमाल के एतिबार से कौन अच्छा है ताकि सवाब उन की जज़ा और इक़ाब उन का बद अअमालियों की बादाश हो। कहां हैं वह लोग कि जो झूट बोलते हुए और हम पर सितम रवां रखते हुए यह दुआ करते हैं कि वह रासिखूना फ़िल इल्म हैं न हम। चूंकि अल्लाह ने हमे बलन्द किया है और उन्हें गिराया है, और हमें मंसबे इमामत दिया है और उन्हें महरूम रखा है और हमें (मंज़िले इल्म में) दाखिल किया है, और उन्हें दूर कर दिया है। हम ही से हिदायत की तलब और गुमराही की तारीकियों को छांटने की ख्वाहिश की जा सकती है। बिला शुब्हा इमाम क़ुरैश में से होंगे जो इसी क़बीले की एक शाख़ बनी हाशिम की किश्तज़ार से उभरेंगे। न इमामत किसी और को ज़ेब देती है और न उन के अलावा कोई उस का अहल हो सकता है।

[इसी ख़ुत्बा का एक जुज़ (अंश) यह है ]

इन लोगों ने दुनिया को इख़तियार कर लिया है और उक़्बा (परलोक) को पीछे डाल दिया है। साफ़ पानी छोड़ दिया है, और गंदा पानी पीने लगे हैं। गोया मैं उन के फ़ासिक़ (व्यभिचारी) को देख रहा हूं कि वह बुराईयों में रहा, इतना कि उन्हीं बुराईंयो से उसे महब्बत हो गई, और उन से मानूस हुआ और उन से इत्ताफ़ाक़ करता रहा। यहां तक कि उन्हीं बुराईयों में उस से सर के बाल सफ़ेद हो गए, और उसी रंग में उस की तबीअत रंग गई। फिर यह कि वह मुंह से कफ़ देता हुआ मुतलातिम दरिया का तरह आगे बढ़ा बग़ैर इस का कुछ ख़याल किये कि किस को डुबो रहा है, और भूसे में लगी हुई आग कि तरह फ़ैला, बग़ैर इस की पर्वाह किये कि कौन सी चीज़ें जला रहा है। कहां हैं हिदायत के चिराग़ से रौशन होनी वाली अक़्लें और कहां हैं तक़्वा के रौशन मीनार की तरफ़ देखने वाली आंखें, और कहां हैं अल्लाह के हो जाने वाले क़ुबूल, और उस की इताअत पर जम जाने वाले दिल ? वह तो माले दुनिया पर टूट पड़े हैं और माले हराम पर झगड़ रहे हैं। उन के सामने जन्नत से मुंह मोड़ लिये हैं और अपने अअमाल की वजह से दोज़ख़ की तरफ़ बढ़ निकले हैं। अल्लाह ने उन लोगों को बुलाया तो वह भड़क उठे और पीठ फिरा कर चल दिये और शैतान ने उन को दअवत दी तो लब्बैक कहते हुए उस की तरफ़ लपक पड़े।

इस से अब्दुल मलिक इब्ने मर्वान मुराद हैं कि जिस ने अपने आमिल हज्जाज इब्ने युसुफ़ के ज़रीए ज़ुल्मों सफ्फाकी की इन्तिहा कर दी थी।