ज़रुरी मसाइल
 




ख़ुम्स




सवाल: ख़ुम्स किन लोगों पर वाजिब है?


जवाब:आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: नमाज़ और रोज़े की तरह हर बालिग़ो आक़िल इंसान पर सालाना बचत का पाचवां हिस्सा बतौरे ख़ुम्स निकालना वाजिब है।


सवाल: क्या बेटी के जहेज़ के पैसों और सामान या वाजिब हज के लिये जमा किये गये पैसों पर ख़ुम्स वाजिब है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: बेटी के (शायाने शान) ख़रीदे गये जहेज़ के सामान और वाजिब हज के लिये जमा किये गये पैसे पर ख़ुम्स वाजिब नही है लेकिन अगर जहेज़ वग़ैरह के लिये रक़्म जमा की है तो उस पर ख़ुम्स वाजिब है।


सवाल: क्या ईनाम या तोहफ़े में मिलने वाली चीज़ पर ख़ुम्स वाजिब है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी: अगर ख़ुम्स की तारीख़ आने पर उस में से कुछ बचा है तो उस पर ख़ुम्स है


आयतुल्लाह ख़ामेनई: उस पर ख़ुम्स वाजिब नही है।


सवाल: अगर एक घर में मर्द व औरत दोनो कमाते हों तो क्या दोनो पर ख़ुम्स वाजिब है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: दोनो पर ख़ुम्स वाजिब है।






फ़ितरा




सवाल: क्या शबे ईद किसी को इफ़तार कराने से उस का फ़ितरा भी वाजिब हो जाता है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: सिर्फ़ इफ़तार कराने से फ़ितरा वाजिब नही होता बल्कि मेयार यह है कि इफ़तार करने वाला उस के यहाँ खाने वाला (नान ख़ोर) शुमार हो।


सवाल: फ़ासिक़ या बे नमाज़ी फ़क़ीर को सदक़ा, फ़ितरा या कफ़्फारा देने का क्या हुक्म है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी: ऐहतेयाते वाजिब की बेना पर इस क़िस्म के अफ़राद को फ़ितरा और कफ़्फ़ारा नही देना चाहिये और दीनदार अफ़राद के होते हुए ऐसे अफ़राद को सदक़ा देने से भी परहेज़ करना चाहिये।


आयतुल्लाह ख़ामेनई: अगर अलानिया फ़िस्क़ व फ़ुजूर में मुब्तला नही है और माल को फ़िस्क़ व फ़ुजूर की राह में ख़र्च नही करता तो कोई हरज नही है।


सवाल: जिस लड़की का अक़्द हो गया है उस का फ़ितरा किस पर वाजिब है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: अगर बाप की किफ़ालत में है तो बाप पर वाजिब है।


सवाल: क्या बेटे के मोहताज होने की सूरत में बाप उसे फ़ितरा दे सकता है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: अगर बेटे मोहताज हों तो मां बाप पर उन की किफ़ालत वाजिब है लेकिन उन्हे फ़ितरा नही दिया जा सकता।







चांद




सवाल: क्या नुजूमी क़वायद व ज़वाबित के ज़रिये चांद साबित किया जा सकता है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: नही, साबित नही होगा सिर्फ़ उस वक़्त साबित हो सकता है जब इंसान को उस के ज़रिये यक़ीन हासिल हो जाये।


सवाल: अगर चंद आदिल अफ़राद गवाही दें कि दो आदिलों ने चांद देखा है तो क्या उससे चांद साबित हो जायेगा?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: नहीं, बल्कि दो आदिल शख़्स ख़ुद इंसान के लिये गवाही दें कि उन्होने चांद देखा है और वास्ते से नक़्ल करें तो काफ़ी नही है अलबत्ता अगर उन के कहने से यक़ीन हासिल हो रहा हो तो काफ़ी है।







क़सम खाना




सवाल: क़सम खाना कैसा है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: क़सम खाने वाली की बात अगर सही हो तो क़सम खाना मकरुह है और अगर झूट हो तो क़सम खाना हराम और गुनाहाने कबीरा में से है।


सवाल: क्या क़सम पर अमल करना ज़रूरी है और क़सम का कफ़्फ़ारा क्या है?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी व ख़ामेनई: अगर ख़ुदा के नामों में से किसी एक नाम की क़सम खाई जाये तो उस पर अमल करना वाजिब है और अमल न करने की सूरत में कफ़्फ़ारा वाजिब है।


क़सम का कफ़्फारा दस मिसकीनों को पेट भर खाना खिलाये या उन्हे लिबास मुहय्या करे और अगर यह नही कर सकता हो तो तीन दिन लगातार रोज़ा रखे।







अम्र बिल मारुफ़ व नही अनिल मुन्कर




सवाल: अम्र बिल मारुफ़ व नही अनिल मुन्कर के क्या शरायत हैं?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी: अम्र बिल मारुफ़ व नही अनिल मुन्कर करने वाले के लिये ज़रूरी है कि वह मारूफ़ व मुन्कर को जानता हो, तासीर का ऐहतेमाल हो, मफ़सदा न हो और बदकारी पर इसरार न हो।


आयतुल्लाह ख़ामेनई: मारुफ़ व मुन्कर को जानता हो, तासीर का ऐहतेमाल हो, शख़्स अपने काम पर मुसिर न हो और अम्र बिल मारुफ़ व नही अनिल मुन्कर करने से मफ़सदा न हो। (यानी उसको या दूसरे को नुक़सान न पहुचे)


सवाल: क्या अम्र बिल मारुफ़ व नही अनिल मुन्कर (नेकी की हिदायत और बुराई से रोकना) सिर्फ़ उलामा पर वाजिब है या सब पर?


जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी: शरायत के मौजूद होने पर हर मुसलमान पर वाजिब है।