इस्लामी संस्कृति व इतिहास
 

4



बनू मूसा ने पहली बार और यूरोप वालों से पांच सौ वर्ष पूर्व केंक शाफ़्ट का अपने कार्य में प्रयोग किया। बनू मूसा के आविष्कारों में से एक जल घड़ी का निर्माण है जो पानी के दबाव से चलती है।



यह घड़ी बाद में उन घडियों का मापदंड बन गयी जो यूरोपीय देशों के बड़े बड़े मैदानों और चर्चों में प्रयोग की जाती थीं। एक निर्धारित समय में उक्त घड़ी से संगीत के सुर निकलते थे।



अबुल फ़त्ह अब्दुर्रहमान ख़ाज़नी उन प्रसिद्ध यंत्र वैज्ञानिकों, तथा भौतिक और खगोल शास्त्रियों में से थे जिनका पालन पोषण इस्लामी सभ्यता के क्षेत्र में हुआ।



ख़ाज़नी ने इब्ने हैसम और बैरूनी का अनुसरण करते हुए यंत्र विज्ञान के क्षेत्र में बहुत सी उपलब्धियां अर्जित की। ख़ाज़नी तुला विज्ञान के बहुत ही दक्ष और निपुण उस्ताद थे।



मीज़ानुल हिकमह नामक उनकी प्रसिद्ध पुस्तक, यंत्र विज्ञान की प्रमुख पुस्तकों मे से एक है।



इस पुस्तक में ख़ाज़नी ने राज़ी, बैरूनी और ख़य्याम जैसे बुद्धिजीवियों के दृष्टिकोण को अपने दृष्टिकोण पर प्राथमिकता दी है।



टाइमर, सामान ऊपर उठाने का यंत्र अर्थात क्रेम तुला, घनत्व मीटर जैसे विभिन्न प्रकार के उपकरण, उनकी इस पुस्तक में लिख हुये हैं।



ख़ाज़नी ने वस्तुओं के भार पर हवा के दबाव के प्रभाव की ओर बहुत ही सूक्ष्मता से संकेत किया है। वह इस संबंध में टोरिचली, पास्कल, बॉयल और दूसरों से कई शताब्दी आगे हैं।



इब्ने हैसम के नाम से प्रसिद्ध अबू अली हसन इब्ने हैसम बसरी, चौथी सहस्त्राब्दी के विख्यात मुसलमान गणितज्ञ, भौतिक शास्त्री और प्रकाश विशेषज्ञ हैं।



उन्होंने भौतिक शास्त्र और यंत्र विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ही मूल्यवान और महत्त्वपूर्ण अविष्कार किये हैं।



वह मध्ययुगीन लैटिन भाषा में लिखी गयी पुस्तकों में अलहाज़िन के नाम से प्रसिद्ध हैं।



इब्ने हैसम को प्रयोगिकी विज्ञान के क्षेत्र का अग्रणी और ध्वजवाहक वैज्ञानिक कहा जा सकता है।



क्योंकि उन्होंने अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोणों विशेषकर प्रकाश के संबंध में अपने दृष्टिकोणों को प्रयोगिकी विज्ञान की शैलियों से प्राप्त किया है।



इब्ने हैसम ने प्रकाश संबंधी विज्ञान के आधार को परिवर्तित करके उसे सुव्यवस्थित और स्पष्ट ढंग से प्रस्तुत किया। वह ओक़लीदोस की भांति सैद्धांतिक और प्रयोगिक भौतिक शास्त्री थे।



उन्होंने प्रकाश की प्रत्यक्ष गति, छाये की विशेषता, लेंस के प्रयोग और ब्लैक रुम की विशेषता को जानने के लिए विभिन्न परीकण अंजाम दिए।



इसी प्रकार उन्होंने प्रकाश के प्रतिबिंबन के नियमों के बारे में आकर्षक शोध किए। इब्ने हैसम ने शीशे की वृत्ताकार और बेलनाकार परिधि में प्रकाश के अपवर्तन के बारे में शोध किया है।



उन्होंने बहुत सी पुस्तकें भी लिखी हैं। मुसलमान और यूरोपीय शोधकर्ताओं ने एक सहस्त्राब्दी पूर्व इब्ने हैसम की कुछ रचनाओं और आलेखों का अनुवाद किया और प्रकाशित किया।



प्रकाश और भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में इब्ने हैसम ने बहुत सी पुस्तक लिखी हैं।