इस्लामी संस्कृति व इतिहास
 


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मुसलमान रसायन विशेषज्ञों में जाबिर बिन हय्यान को बहुत अधिक ख्याति प्राप्त हुई।



रसायन विज्ञान की सबसे महतव्पूर्ण रचनाओं का संबंध जाबिर बिन हय्यान से ही है जिसे इस्लामी जगत ही नहीं अपितु पश्चिमी देशों में भी रसायन शास्त्र के क्षेत्र में मूल्यवान ज्ञान स्रोत समझा जाता है।



जाबिर बिन हय्यान ईरानी ने और ख़ुरासन के तूस नामक क्षेत्र में उनका जन्म हुआ था। वे पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के शिष्य थे।



उनके जीवन में काया पलट कर देने वाला महत्वपूर्ण कारक इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की शिक्षाएं और उसने मिलने वाला ज्ञान था।



इतिहासकार इब्ने ख़ल्लकान इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की जीवनी में लिखते हैं कि उनके शिष्य अबू मूसा जाबिर बिन हय्यान ने एक पुस्तक लिखी है जिसमें हज़रत इमाम जाफ़र सादिख अलैहिस्सलाम के पांच सौ लेख हैं।



जाबिर बिन हय्यान के निकट खनिज पदार्थों का महत्व बहुत अधिक था। धातुओं के रूप को बदलने यहां तक कि सोने को किसी नए धातु में परिवर्तित कर देने की क्रियाओं पर वे विशेष रूप



से ध्यान देते थे। वे प्रकृति के भीतर एक सुव्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रयासरत थे किंतु उन्होंने प्रकृति और पराभौतिकी के बीच संपर्क के माध्यम से यह व्यवस्था स्थापित की।



जाबिर बिन हय्यान की सफल वैज्ञानिक उपलब्धियों से मुसलमानों में रसायन शास्त्र प्रयोगशाला के मूल विषयों में शामिल हो गया। जाबिर बिन हय्यान रसायन शास्त्र में दक्ष



थे तथा खनिज पत्थरों के रूप बदलते रहते थे। उन्होंने तांबा और सीसा जैसी धातुओं की पहचान करने और उन्हें मूल्यवान धातुओं में परिवर्तित करने के बारे में उन्होंने को पुस्तके लिखी हैं।



उन्होंने पहली बार सलफ़रिक एसिड तैयार किया। जाबिर बिन हय्यान पानी, दूध और तेल जैसे तरल पदार्थों पर आसवन प्रक्रिया का प्रयोग करते थे।



जाबिर बिन हय्यान की दृष्टि में सोने को विभिन्न चरणों में खौला कर पारसमणि प्राप्त करना संभव था जाबिर, निम्न स्तरीय धातुओं को उच्च स्तरीय धातुओं में बदलने के लिए पारसमणि



की प्राप्ति के लिए अनथक प्रयास किये।



जाबिर बिन हैयान तूसी की रसायनशास्त्र में अत्याधिक महत्वपूर्ण व मूल्यवान रचनाएं हैं। कहा जाता है कि उन्होंने लगभग तीन हज़ार पुस्तक और पुस्तिकाएं लिखी हैं।



जर्मनी के प्रसिद्ध विद्वान और शोधकर्ता, पॉल क्राउस ने जिन्होंने जाबिन बिन हैयान की रचनाओं के बारे में शोध किया है , कहते हैं कि जाबिर कों हमें एसी हस्ती समझना चाहिए जिन्होंने



प्राचीन ज्ञान को अरबी में स्थानांतरित किया है। वे अत्याधिक ज्ञानी और स्वाधीन व्यक्तित्व के स्वामी हैं कि जिन्हें यूनानी साहित्य का पूर्ण ज्ञान है।



हमें जाबिर बिन हैयान को ढेर सारी वैज्ञानिक परिभाषाओं का जनक समझना चाहिए और यह विश्वास रखना चाहिए कि जाबिर बिन हैयान ने इन शब्दों और परिभाषाओं को तीसरी हिजरी



शताब्दी के अनुवादकों के लिए तैयार किया था और उनका काम सरल बनाया था। जाबिरी संग्रह की विभिन्न किताबों में सृष्टि की पहचान, खगोलशास्त्र तथा कीमियागिरी से लेकर



संगीत व अंकज्ञान व शब्दज्ञान तक के विषयों पर चर्चा की गयी है। यह चर्चाएं प्राचीन ज्ञान विज्ञान को समझने के लिए अत्याधिक महत्व रखती हैं।