इस्लामी संस्कृति व इतिहास
 

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अतीत से ही रसायन विज्ञान पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाता रहा है। बीते हुए युगों के लोग रसायन ज्ञान को कीमिया के नाम से जानते थे



और इसे ज्ञान, कला तथा जादू से मिलकर बनने वाला ज्ञान समझते थे किंतु धीरे धीरे इस क्षेत्र में परिवर्तन आया और रसायन शास्त्र उन्नति करते करते वर्तमान रूप तक पहुंचा।



इस ज्ञान में धातुओं और खनिज पदार्थों का उपयोग होता था किंतु यह धारणा पायी जाती थी कि



पदार्थों का केवल भौतिक अस्तित्व ही उनका सब कुछ नहीं बल्कि यह विश्व में कुछ प्रतीकों के रूप में प्रकृति के संबंध में अपनी भूमिका निभाते हैं और यही कारण है



कि इस ज्ञान के विशेषज्ञ पदार्थों के परिचय के लिए ग्रहों का उपयोग करते हैं। जैसे सोने को सूर्य के माध्यम से और चांदी को चंद्रमा के माध्यम से परिचित करवाते हैं।



कुछ रसायन विशेषज्ञ एसे भी थे जो इस ज्ञान के मनोवैज्ञानिक और आत्मिक आयामों पर ध्यान केन्द्रित रखते थे और उनका प्रयास रहता था कि तांबे को सोना बना दें।



उनका मूल लक्ष्य आत्मा का उत्थान और मनुष्य को उच्च मानवीय स्थानों तक पहुंचाना होता था।



प्राचीन काल में रसायन विज्ञान एसा ज्ञान था कि जो प्रकृति का भी अध्ययन करता था और साथ ही



अध्यात्म एवं दर्शनशास्त्र पर भी दृष्टि रखता था। इस ज्ञान में धातु, भौतिकी, चिकित्सा, खगोल शास्त्र अंतरज्ञान तथा अलौकिक दुनिया पर आस्था पर आधारित था।



विशेषज्ञों की दृष्टि में सृष्टि के रचयिता से श्रद्धा रखनी चाहिए जो धातुओं और खनिज पदार्थों को अस्तित्व प्रदान करता है। यह ज्ञान खनिज पदार्थ और धातुओं का गहरा अध्ययन करता था।



कीमिया ज्ञान के विशेषज्ञ पारसमणि नामक पदार्थ की खोज में लगे रहते थे जिसके माध्यम से महत्वहीन धातुओं जैसे लोहा और तांबा को सोना और चांदी बनाया जा सकता था।



वे इस पदार्थ को एक प्रकार की अलौकिक शक्ति भी मानते थे। यह ज्ञान पहली बार पश्चिमी देशों और मिस्र के इसकंदरिया नगर में विधिवत और संकलित विज्ञान के रूप में पेश किया गया।



रसायन विज्ञान के विषय में मुसलमान वैज्ञानिकों का योगदान ध्यान योग्य स्तर तक है।



अनेक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि रसायन शास्त्र से जो विषय इस समय मन में आता है उसका यह रूप बारह शताब्दियों पूर्व इस्लाम के उदय के पश्चात मुसलमान वैज्ञानिकों के परिश्रम का प्रतिफल है।



मुसलमान वैज्ञानिकों ने रसायन ज्ञान की विभिन्न शाखाओं पर सघन शोध कार्य किया।



कुछ मुसलमान रसायन शस्त्रियों ने अपना सारा ध्यान रसायन विज्ञान के आंतरिक परिवर्तनों पर ध्यान केन्द्रित किया। कुछ विशेषज्ञों ने विभिन्न पदार्थों की रासायनिक प्रतिक्रिया पर काम किया।



जैसे कि अबुल क़ासिम मोहम्मद इराक़ी, ज़करिया राज़ी और जाबिर बिन हय्यन तूसी ने रसायन विज्ञान की अलग अलग शाखाओं के बारे में शोध कार्य किए।