शिओं के बुज़ुर्ग उलमा
 



अली पुत्र बाबवे क़ुम्मी अलैहिर्रहमा



शहीद मुतह्हरी का कथन

अबुल हसन पुत्र अली पुत्र हुसैन पुत्र मूसा पुत्र बाबवे एक प्रसिद्ध फ़कीह थे। वह अपने समय मे क़ुम के फ़कीहों व मुहद्दिसों के सरदार थे। समस्त शिया धार्मिक कार्यो मे उनसे सम्बन्ध स्थापित करते थे। उनका फ़तवा सबकी दृष्टी मे आदरनीय था।

उनकी श्रेष्ठता व पवित्रता का इस बात से अंदाज़ा लगाया जासकता है कि अगर किसी विषय मे अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के कथन न मिलते हो और उस सम्बन्ध मे इनका फ़तवा मौजूद हो तो क्योकि उनका जीवन काल इमामे मासूम के समय से बहुत समीप था अतः हमारे फ़कीह उनके फ़तवे को हदीस के बराबर मानते थे।और उनके फ़तवे को उस विषय मे हदीस होने का आधार मानते थे। जैसा कि शहीदे अव्वल ने अपनी किताब ज़िकरी मे इस प्रकार वर्णन किया है। “हमारे फ़कीह क्योंकि उन पर पूर्ण रूप से विशवास करते थे अतः जिस विषय मे वह दलील (तर्क) नही रखते थे उस विषय के बारे मे अली पुत्र बाबवे क़ुम्मी के रिसाले से दली प्राप्त करते थे।”

इब्ने नदीम का कथन

प्रसिद्ध इतिहासकार इब्ने नदीम अपनी किताब फ़हरिस्त मे लिखते हैं कि “इब्ने बाबवे अली पुत्र मूसा क़ुम्मी शियों के एक विशवसनीय फ़कीह थे।“

इमामे ज़माना की विशेष कृपा

अली पुत्र बाबवे क़ुम्मी इमामे ज़माना की कृपा के विशेष पात्र हुए तथा इमामे ज़माना का एक पत्र भी आदरनीय हुसैन पुत्र नोबख्ती की मध्यस्था से उनको प्रप्त हुआ। इस पत्र के सार का नजाशी ने अपनी किताब रिजाले नजाशी मे इस प्रकार वर्णन किया है।“अबुल हसन पुत्र अली पुत्र हुसैन पुत्र मूसा पुत्र बाबवे क़ुम्मी जो क़ुम के लोगों के फ़कीह व उनके विशवसनीय हैं वह इराक़ आये। तथा अबुल क़ासिम हुसैन पुत्र रूह से मुलाक़ात कर उनसे कुछसवाल किये।तथा बाद मे कुछ बातों को लिखित रूप मे दिया और लिखने का कार्य अली पुत्र जाफ़र पुत्र असवद ने किया। इन लेखो मे से एक लेख के बारे मे उन्होने कहा कि इसको इमामे ज़माना की खिदमत (सेवा) मे भेज दिया जाये । इस पत्र मे इमाम से संतान प्राप्ति के लिए दुआ की प्रार्थना की गई थी। इस का उत्तर इमाम से इस प्रकार प्राप्त हुआ कि हमने अल्लाह से दुआ करदी है कि वह आपको संतान प्रदान करे। अतः आपको शीघ्र ही दो नेक बेटे प्राप्त होगें।”

इसके बाद अबु जाफ़र व अबु अब्दुल्लाह नामक दो बेटे उनको प्राप्त हुए। अबु अब्दुल्लाह हुसैन पुत्र अबीदुल्लाह ने उल्लेख किया है कि मैंने अबु जाफ़र से सुना है कि वह बार बार कहते थे कि” मैं इमामे ज़माना की दुआ से इस संसार मे आया हूँ।” वह हमेशा इस पर गर्व करते थे।

अली पुत्र बाबवे क़ुम्मी की रचनाऐं

अली पुत्र बाबवे क़ुम्मी की अनेक रचनाऐं हैं इनमे से मुख्य इस प्रकार हैं। किताबे शराए इस किताब को उन्होने विशेष रूप से अपने पुत्र सदूक़ (रहमतुल्लाह अलैह) के लिए लिखा। उनकी अन्य रचनाऐं इस प्रकार हैं--- रिसालःतुल इखवान, कुर्बुल असनाद, तफ़सीरे क़ुऑने करीम, किताबुन निकाह, अन्नवादिर, किताबुत्तौहीद, अस्सलात, मनासिके हज इत्यादि---

स्वर्गवास

आदरनीय अली पुत्र बाबवे क़ुम्मी का स्वर्गवास 329 हिजरी क़मरी मे हुआ। उनको क़ुम मे मासूमा के हरम के सहन के क़रीब (समीप) दफ़्न किया गया।

वह एक महानव विद्वान थे अल्लाह उन पर रहमत करे।