शिया और इस्लाम
 


संसार पर बुद्धिमत्ता पूर्ण एकता का अधिपत्य



इस्लाम मे इस बात की ओर विशेष रूप से ध्यान को आकर्षित करा गया है। और इसी कारण इंसान के आध्यात्मिक जीवन के सुधार के लिए जो नीतियाँ बनाई गयीं है। उन में इस बात को ध्यान में रखा गया है कि यह नितियाँ आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ समाजिक व व्यक्तिगत स्तर पर मानव के भौतिक जीवन के विकास में भी सहायक हो। अतः वह प्रत्येक आदेश जो इंसान के भौतिक जीवन के किसी अंश के सम्बन्ध में जारी होता है वह आस्था के मूल तत्वों, सदाचार व आध्यात्मिकता से परिपूर्ण होता है। और यह अल्लाह की एक सुन्नत[1] है।

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[1] यहां पर सुन्नत से अभिप्राय वह निश्चित्ताऐं हैं जिनके द्वारा संसार का संचालन किया जा रहा है और इनमें परिवर्तन नही होता है। जैसे कि क़ुराने करीम के सूरए फ़ातिर की आयत न. 42 में कहा गया है कि “अल्लाह की सुन्नत में परिवर्तन नही आता।