शिया और इस्लाम
 



इस्लाम धर्म व शिया समप्रदाय का संक्षिप्त परिचय



बिस्मिल्लाहहिर्रहमानिर्रहीम



प्रस्तावना

यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि मानव समाज व संस्कृति पर सदैव आसमानी धर्मो का प्रभाव रहा है। पिछली शताब्दी के बारे में कहा जाता है कि इस में मानव “वही” को छोड़ कर “बुद्धि” की ओर उन्मुख हुआ है। परन्तु वास्तविक्ता यह है कि मनुष्य के बौद्धिक जीवन का मूल भी धर्म मे ही पाया जाता है।

इस समय यहूदी, इसाई व इस्लाम धर्म ही संसार के मुख्य तथा जीवित धर्म हैं। इस समय संसार में सबसे अधिक इसाई धर्म के अनुयायी पाये जाते हैं। तथाअनुयाईयों की सख्या के आधार पर इस्लाम धर्म द्वितीय स्थान पर है।

इस्लाम अन्तिम आसमानी धर्म है और इस धर्म को हज़रत मुहम्मह (स.) के द्वारा मानव जाती के सम्मुख प्रस्तुत किया गया है। इस्लाम धर्म अपने प्रारम्भिक चरण से अब तक तीव्र गति से विकास की ओर उन्मुख है। बीसवी शताब्दी को तो इस्लाम के तीव्र विकास की शताब्दी समझा गया था। परन्तु इक्कीसवी शताब्दी को तो “इस्लामी शताब्दी”की ही संज्ञा दे दी गयी है।

आदरनीय आदम अलैहिस्सलाम के जन्म के समय से ही अल्लाह की ओर से मानव जाति के लिए “वही” व “मार्ग दर्शन” का कार्य शुरू हो गया था। आदरनीय आदम (अ.) अल्लाह के प्रथम पैगम्बर थे। उनके पश्चात एक के बाद एक नबी आते रहे और समय की माँग के अनुसार अल्लाह की ओर से मिलने वाले संदेश को मानवता तक पहुँचाते रहे।

वैसे तो सभी आसमानी धर्मों मे व्यापक स्तर पर एकता पायी जाती है। परन्तु हर नये धर्म में इतनी अच्छाइयाँ पायी जाती हैं कि वह अपने से पहले वाले धर्म को निरस्त कर देता है। और इस्लाम तो वह धर्म है जिसके सम्बन्ध में पिछले समस्त धर्मों ने अपने - अपने अनुयाईयों को अवगत कराया है कि इस्लाम अन्तिम आसमानी धर्म है। अर्थात इस्लाम के बाद मानव पर अल्लाह की ओर से आने वाली वही के द्वार बन्द हो गये हैं। प्रकृतिक रूप से इस्लाम धर्म मे इतनी व्यापकता पाई जाती है कि वह अनंत काल तक मानव की समस्त आवश्यक्ताओं की पूर्ति कर सकता है। चाहे मानव जाति में कितने ही परिवर्तन क्यों न आजायें। इस लेख में जो कुछ भी कहा गया है वह इस्लाम धर्म के मूल भूत तत्वों और पैगम्बर के अहलेबैते द्वारा वर्णित शिया सम्प्रदाय से सम्बन्धित है। यह लेख जहाँ मुसलमानों के लिए गर्व होगा वहीं अन्य धर्मों के अनुयाईयों के लिए भी विचारनीय होगा।