ख़ुत्बात
 
240-आपका इरशादे गिरामी
(जिन दिनों में उस्मान इब्ने अफ़्फ़ान मुहासेरे में थे तो अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास उनकी एक तहरीर लेकर अमीरूल मोमेनीन (अ0) के पास आए जिसमें आपसे ख़्वाहिश की थी के आप अपनी जागीरी नबा की तरफ़ चले जाएं ताके खि़लाफ़त के लिये जो हज़रत का नाम पुकारा जा रहा है उसमें कुछ कमी आ जाए और वह ऐसी दरख़्वास्त पहले भी कर चुके थे जिस पर हज़रत ने इब्ने अब्बास से फ़रमाया) -


ऐ इब्ने अब्बास! उस्मान तो बस यह चाहते हैं के वह मुझे अपना ‘ातरआब कश बना लें जो डोल के साथ कभी आगे बढ़ता है और कभी पीछे हटता है, उन्होंने पहले भी यही पैग़ाम भेजा था के मैं (मदीने) से बाहर निकल जाऊं और इसके बाद यह कहलवा भेजा के मैं पलट आऊं, अब फिर वह पैग़ाम भेजते हैं के मैं यहां से चला जाऊँ (जहां तक मुनासिब था) मैंने उनको बचाया, अब तो मुझे डर है के मैं (उनको मदद देने से) कहीं गुनहगार न हो जाऊं।