ख़ुत्बात
 
238-आपका इरशादे गिरामी
(दोनों सालेसों (अबू मूसा व अम्रो इब्ने आस) के बारे में और अहले ‘ााम की मज़म्मत में फ़रमाया)


वह तून्द ख़ू औ बाश और कमीने बदक़माश हैं के जो हर तरफ़ से इकट्ठा कर लिये गये हैं और मख़लूतुलनसब लोगों में से चुन लिये गए हैं, वह उन लोगों में से हैं जो जेहालत की बिना पर इस क़ाबिल हैं के उन्हें (अभी इस्लाम के मुताल्लिक़) कुछ बताया जाए और ‘ााइस्तगी सिखाई जाए (अच्छाई और बुराई की तालीम) दी जाए और (अमल की) मशक़ कराई जाए और उन पर किसी निगरान को छोड़ा जाए और उनके हाथ पकड़कर चलाया जाए, न तो वह मुहाजिर हैं न अन्सार और न इन लोगों में से हैं जो मदीने में फरोकश थे।
देखो! अहले ‘ााम ने तो अपने लिये ऐसे ‘ाख़्स को मुन्तख़ब किया है जो उनके पसन्दीदा मक़सद के बहुत क़रीब है और तुमने ऐसे ‘ाख़्स को चुना है जो तुम्हारे नापसन्दीदा मक़सद से इन्तेहाई नज़दीक है। तुमको अब्दुल्लाह इब्ने क़ैस (अबू मूसा) का कल वाला वक़्त याद होगा (के वह कहता फिरता था) के ‘‘यह जंग एक फ़ित्ना है लेहाज़ा अपनी कमानों के चिल्लों को तोड़ दो और तलवारों को न्यामों में रख लो’’ अगर वह अपने इस क़ौल में सच्चा था तो (हमारे साथ) चल खड़ा होने में ख़ताकार है के जबके इस पर कोई जब्र भी नहीं और अगर झूठा था तो इस पर (तुम्हें) बे एतमादी होना चाहिये लेहाज़ा अम्रो इब्ने आस के धकेलने के लिये अब्दुल्लाह इब्ने आस को मुन्तख़ब करो, इन दोनों की मोहलत ग़नीमत जानो और इसलामी (‘ाहरों की) सरहदों को घेर लो क्या तुम अपने ‘ाहरों को नहीं देखते के उन पर हमले हो रहे हैं और तुम्हारी क़ूवत व ताक़त को निशाना बनाया जा रहा है।