ख़ुत्बात
 
232-आपका इरशादे गिरामी
(अब्दुल्लाह इब्ने ज़मा जो आपकी जमाअत में महसूब होता था आप (अ0) के ज़मानए खि़लाफ़त में कुछ माल तलब करने के लिये हज़रत (अ0) के पास आया तो आप (अ0) ने इरशाद फ़रमाया)


यह माल न मेरा है न तुम्हारा बल्कि मुसलमानों का हक़्क़े मुश्तरका और उनकी तलवारों का जमा किया हुआ सरमाया है। अगर तुम उनके साथ जंग में ‘ारीक हुए होते तो तुम्हारा हिस्सा भी उनके बराबर होता, वरना उनके हाथों की कमाई दूसरों के मुंह का निवाला बनने के लिये नहीं है।