ख़ुत्बात
 
227-आपकी दुआ का एक हिस्सा
(जिसमें नेक रास्ते की हिदायत का मुतालेबा किया गया है)

परवरदिगार तू अपने दोस्तों के लिये तमाम उन्स फ़राहम करने वालों से ज़्यादा सबबे उन्स और तमाम अपने ऊपर (तुझ पर) भरोसा करने वालों के लिये सबसे ज़्यादा हाजतरवाई के लिये हाज़िर है। तू उनकी बातिनी कैफ़ियतों को देखता और उनके छिपे हुए भेदों पर निगाह रखता है और उनकी बसीरतों की आखि़री हदों को भी जानता है। उनके इसरार तेरे लिये रौशन और उनके क़ुलूब तेरी बारगाह में फ़रियादी हैं। जब ग़ुरबत उन्हें मुतवहश (घबराहट) करती है तो तेरी याद उन्स का सामान फ़राहम कर देती है और जब मसाएब उन पर उन्डेल दिये जाते हैं तो वह तेरी पनाह तलाश कर लेते हैं इसलिये के उन्हें इस बात का इल्म है के तमाम मामलात की ज़माम तेरे हाथ में है और तमाम उमूर का फ़ैसला तेरी ही ज़ात से सादर (वाबस्ता) होता है।


ख़ुदाया! अगर मैं अपने सवालात को पेश करने से आजिज़ हूँ और मुझे अपने मुतालेबात की राह नज़र नहीं आती है तो तू मेरे मसालेह की रहनुमाई फ़रमा और मेरे दिल को हिदायत की मन्ज़िलों तक पहुंचा दे के यह बात तेरी हिदायतों के लिये कोई अनोखी नहीं है और तेरी हाजत रवाइयों के सिलसिले में कोई निराली नहीं है।


ख़ुदाया मेरे मामलात को अपने अफ़्व व करम पर महमूल (तय) करना और अद्ल व इन्साफ़ पर महमूल (तय) न करना।