ख़ुत्बात
 
226-आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें दुनिया से नफ़रत दिलाई गई है)


यह एक ऐसा घर है जो बलाओं में घिरा हुआ है और अपनी ग़द्दारी में मशहूर है न इसके हालात को दवाम है और न इसमें नाज़िल होने वालों के लिये सलामती है।
इसके हालात मुख़्तलिफ़ और इसके अतवार बदलने वाले हैं। इसमें पुरकैफ़ ज़िन्दगी क़ाबिले मज़म्मत है और इसमें अम्न व अमान का दूर दूर पता नहीं है। इसके बाशिन्दे वह निशाने हैं जिन पर दुनिया अपने तीर चलाती रहती है और अपनी मुद्दत के सहारे उन्हें फ़ना के घाट उतारती रहती है।


बन्दगाने ख़ुदा! याद रखो इस दुनिया में तुम और जो कुछ तुम्हारे पास है सबका वही रास्ता है जिस पर पहले वाले चल चुके हैं जिनकी उम्रें तुमसे ज़्यादा तवील और जिनके इलाक़े तुमसे ज़्यादा आबाद थे। उनके आसार (पाएदार निशानियां) भी दूर दूर तक फैले हुए थे। लेकिन अब उनकी आवाज़ें दब गई हैं उनकी हवाएं उखड़ गई हैं। इनके जिस्म बोसीदा हो गए हैं। इनके मकानात ख़ाली हो गए हैं और इनके आसार मिट गए हैं। वह मुस्तहकम क़िलों और बिछी हुई मसनदों को पत्थरों और चुनी हुई सिलों और ज़मीन के अन्दर लहद वाली क़ब्रों में तबदील कर चुके हैं। उनके सहनों की बुनियाद तबाही पर क़ायम है और जिनकी इमारत मिट्टी से मज़बूत की गई है। इन क़ब्रों की जगहें तो क़रीब-क़रीब हैं लेकिन इनके रहने वाले सब एक-दूसरे से ग़रीब और अजनबी हैं। ऐसे लोगों के दरम्यान हैं जो बौखलाए हुए हैं और यहों के कामों से फ़ारिग़ होकर वहाँ की फ़िक्र में मशग़ूल हो गए हैं। न अपने वतन से कोई उन्स रखते हैं और न अपने हमसायों से कोई राबेता रखते हैं।


(((-यह फ़िक़रात बेऐनेही इसी तरह इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ0) की मकारमे इख़लाक़ में भी पाए जाते हैं जो इस बात की अलामत है के अहलेबैत (अ0) का किरदार और उनका पैग़ाम हमेशा एक अन्दाज़ का होता है और इसमें किसी तरह का इख़्तेलाफ़ व इन्तेशार नहीं होता है।
इस ख़ुत्बे में दुनिया के हस्बे ज़ैल ख़ुसूसियात का तज़किरा किया गया हैः 1- यह मकान बलाओं में घिरा हुआ है। 2- इसकी ग़द्दारी मारूफ़ है। 3- इसके हालात हमेशा बदलते रहते हैं। 4- इसकी ज़िन्दगी का अन्जाम मौत है। 5- इसकी ज़िन्दगी क़ाबिले मज़म्मत है। 6- इसमें अम्न व अमान नहीं है। 7- इसके बाशिन्दे बलाओं और मुसीबतों का हदफ़ हैं।-)))


बल्कि बिल्कुल क़रीब व जवार और नज़दीकतरीन दयार में हैं और ज़ाहिर है के अब मुलाक़ात का क्या इमकान है जबके बोसीदगी ने उन्हें अपने सीने से दबाकर पीस डाला है और पत्थरों और मिट्टी ने उन्हें खाकर बराबर कर दिया है और गोया के अब तुम भी वहीं पहुंच गए हो जहां वह पहुंच चुके हैं और तुम्हें भी इसी क़ब्र ने गिर्द रख लिया है और इसी अमानतगाह ने जकड़ लिया है।
सोचो! उस वक़्त क्या होगा जब तुम्हारे तमाम मुआमलात आखि़री हद को पहुंच जाएंगे और दोबारा क़ब्रों से निकाल लिया जाएगा, उस वक़्त हर नफ़्स अपने आमाल का ख़ुद मुहासेबा करेगा और सबको मालिके बरहक़ की तरफ़ पलटा दिया जाएगा और किसी की कोई इफ़तर परवाज़ी काम आने वाली नहीं होगी।