ख़ुत्बात
 
222- आपका इरशादे गिरामी
(जिसे आयते करीम ‘‘योसब्बेह लहू फीहा ..................तेजारता वला यबआ अन ज़िकरिल्लाह’’ (उन घरों में सुबहो ‘ााम तस्बीहे परवरदिगार करने वाले वह अफ़राद हैं जिन्हें तिजारत और कारोबार यादे ख़ुदा से ग़ाफ़िल नहीं बना सकते हैं) की तिलावत के बाद फ़रमाया)



बेशक परवरदिगार (अल्लाह सुबहानहू) ने अपने ज़िक्र को दिलों के लिये सैक़ल क़रार दिया है जिसकी बिना पर वह बहरेपन के बाद सुनने लगते हैं और अन्धेपन के बाद देखने लगते हैं और अनाद और ज़िद (दुश्मनी) के बाद फ़रमाबरदार हो जाते हैं और ख़ुदाए अज़्ज़ व जल (जिसकी नेमतें अज़ीम व जलील हैं) के लिये हर दौर में और हर अहदे फ़ितरत में ऐसे बन्दे रहे हैं जिनसे उसने उनके उफ़कार के ज़रिये राज़दाराना गुफ़्तगू की है और उनकी अक़्लों के वसीले से उनसे कलाम किया है और उन्होंने अपनी बसारत, समाअत और फ़िक्र की बेदारी के नूर की रौशनी हासिल की है। उन्हें अल्लाह के मख़सूस दिनों की याद अता की गई है और वह उसकी अज़मत से ख़ौफ़ज़दा रहते हैं। इनकी मिसाल बियाबानों के राहनुमाओं जैसी है के जो सही रास्ते पर चलता है उसकी रूश की तारीफ़ करते हैं और उसे निजात की बशारत देते हैं और जो दाहिने बाएं चला जाता है उसके रास्ते की मज़म्मत करते हैं और उसे हलाकत से डराते हैं और इसी अन्दाज़ से यह ज़ुल्मतों के चिराग़ और ‘ाबाहत के रहनुमा हैं।
बेशक ज़िक्रे ख़ुदाा के भी कुछ अहल हैं जिन्होंने इसे सारी दुनिया का बदल क़रार दिया है और अब उन्हें तिजारत या ख़रीद फ़रोख़्त उस ज़िक्र से ग़ाफ़िल नहीं कर सकती है। यह उसके सहारे ज़िन्दगी के दिन काटते हैं और ग़ाफ़िलों के कानों में मोहर्रमात के रोकने वाली आवाज़ें दाखि़ल कर देते हैं। लोगों को नेकियों का हुक्म देते हैं और ख़ुद भी इसी पर अमल करते है। बुराइयों से रोकते हैं और ख़ुद भी बाजज़ रहते हैं गोया उन्होंने दुनिया मेंरहकर आखि़रत तक का फ़ासला तय कर लिया है और पस पर्दाए दुनिया जो कुछ है सब देख लिया है और गोया के उन्होंने बरज़ख़ के तवील व अरीज़ ज़माने के मख़फ़ी हालात पर इत्तेला हासिल कर ली है और गोया के क़यामत ने उनके लिये अपने वादों को पूरा कर दिया है और उन्होंने अहले दुनिया के लिये इस पर्दे को उठा दिया है। के अब वह उन चीज़ों को देख रहे हैं जिन्हें आम लोग नहीं देख सकते हैं और उन आवाज़ों को सुन रहे हैं जिन्हें दूसरे लोग नहीं सुन सकते हैं। अगर तुम अपनी अक़्ल से उनकी इस तसवीर को तैयार करो जो उनके क़ाबिले तारीफ़ मक़ामात और क़ाबिले हुज़ूर मजालिस की है। जहां उन्होंने अपने आमाल के दफ़्तर फैलाए हुए हैं और अपने हर छोटे बड़े अमल का हिसाब देने के लिये तैयार हैं जिनका हुक्म दिया गया था और उनमें कोताही हो गई है या जिनसे रोका गया था और तक़सीर हो गई है और अपनी पुश्त पर तमाम आमाल का बोझ उठाए हुए हैं लेकिन उठाने के क़ाबिल नहीं हैं और अब रोते रोते हिचकियाँ बन्ध गई हैं और एक दूसरे को रो-रो कर उसके सवाल का जवाब दे रहे हैं और निदामत और एतराफ़े गुनाह के साथ परवरदिगार की बारगाह में फ़रयाद कर रहे हैं। तो वह तुम्हें हिदायत के निशान और तारीकी के चिराग़ नज़र आएंगे जिनके गिर्द मलाएका का घेरा होगा और उन पर परवरदिगार की तरफ़ से सुकून व इतमीनान का मुसलसल नुज़ूल होगा और उनके लिये आसमान के दरवाज़े खोल दिये गए होंगे और करामतों की मन्ज़िलें मुहैया कर दी गई होंगी।


(((-इन हक़ाएक़ का सही इज़हार वही कर सकता है जो यक़ीन की इस आखि़री मंज़िल पर फ़ाएज़ हो जिसके बाद खुद यह एलान करता हो के अब अगर पर्दे हटा भी दिये जाएं तो यक़ीन में किसी तरह का इज़ाफ़ा नहीं हो सकता और हक़ीक़ते अम्र यह है के इस्लाम में अहले ज़िक्र सिर्फ़ साहेबाने इल्म व फ़ज़ल का नाम नहीं है बल्कि ज़िक्रे इलाही का अहल बनाकर उन अफ़राद को क़रार दिया गया है जो तक़वा और परहेज़गारी की आखि़री मन्ज़िल पर हों और आखि़रत को अपनी निगाहों से देखकर सारी दुनिया को राह व चाह से आगाह कर रहे हों। मलाएका मुक़र्रबीन में उनके गिर्द घेरे डाले हों लेकिन इसके बाद भी अज़मत व जलाले इलाही के तसव्वुर अपने आमाल को बेक़ीमत समझ कर लरज़ रहे हों और मुसलसल अपनी कोताहियों का इक़रार कर रहे हों। -)))


ऐसे मक़ाम पर जहां मालिक की निगाह उनकी तरफ़ हो और वह उनकी सई से राज़ी हो और उनकी मन्ज़िल की तारीफ़ कर रहा हो। वह मालिक को पुकारने की फ़रहत से बख़्िशश की हवाओं में सांस लेते हों। उसके फ़ज़्ल व करम की एहतियाज के हाथों रेहन (गिरवीं) हों और उसकी अज़मत के सामने ज़िल्लत के असीर हों। ग़म व अन्दोह के तूले ज़मान ने उनके दिलों को मजरूह कर दिया हो और मुसलसल गिरया ने उनकी आंखों को ज़ख़्मी कर दिया हो। मालिक की तरफ़ रग़बत के हर दरवााज़े को खटखटा रहे हों और उससे सवाल कर रहे हों जिसके जूदो करम की वुसअतों में तंगी नहीं आती है और जिसकी तरफ़ रग़बत करने वाले कभी मायूस नहीं होते हैं। देखो अपनी भलाई के लिये ख़ुद अपने नफ़्स का हिसाब करो के दूसरों के नफ़्स का हिसाब करने वाला कोई और है।