ख़ुत्बात
 
219- आपका इरशादे गिरामी
(जब रोज़े जमल तल्हा बिन अब्दुल्लाह और अब्दुर्रहमान बिन अताब बिन उसीद की लाशों के क़रीब से गुज़र हुआ)


अबू मोहम्मद (तल्हा) ने इस मैदान में आलमे ग़ुरबत में सुबह की है, ख़ुदा गवाह है के मुझे यह बात हरगिज़ पसन्द नहीं थी के क़ुरैश के चमकते सितारों के नीचे ज़ेरे आसमान पड़े रहें लेकिन क्या करूं। बहरहाल मैंने अब्द मुनाफ़ की औलाद से उनके किये का बदला ले लिया है (लेकिन) अफ़सोस के बनी जमअ बच कर निकल गए उन सबने अपनी गर्दनें इस अम्र की तरफ़ उठाई थीं जिसके यह हरगिज़ अहल नहीं थे। इसीलिये यहाँ तक पहुंचने से पहले ही इनकी गर्दनें तोड़ दी गईं।