ख़ुत्बात
 
207- आपका इरषादे गिरामी

(जंगे सिफ़्फ़ीन के दौरान जब इमाम हसन (अ0) को मैदाने जंग की तरफ़ सबक़त करते हुए देख लिया)


देखो! इस फ़रज़न्द को रोक लो कहीं इसका सदमा मुझे बेहाल न कर दे, मैं इन दोनों (हसन (अ0) व हुसैन (अ0)) को मौत के मुक़ाबले ज़्यादा अज़ीज़ रखता हूँ। कहीं ऐसा न हो के इनके मर जाने से नस्ले रसूल (स0) मुन्क़ता हो जाए।


सय्यद रज़ी - ‘‘अमलको आनी हाज़ल ग़ुलाम’’ अरब का बलन्दतरीन कलाम और फ़सीहतरीन मुहावरा है।