ख़ुत्बात
 
196-आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें सरकारे दो आलम (स0) की मद्हा की गई है)


प्रवरदिगार ने आपको उस वक़्त मबऊस किया जब न कोई निषाने हिदायत क़ायम रह गया था और न कोई मिनारए दीन रौषन था और न कोई रास्ता वाज़ेह था।
बन्दगाने ख़ुदा! मैं तुम्हें तक़वा इलाही की वसीयत करता हूँ और दुनिया से होषियार कर रहा हूँ के यह कूच का घर और बदमज़गी का इलाक़ा है, इसका बाषिन्दा हर हाल सफ़र करने वाला है और इसका मुक़ीम बहरहाल जुदा होने वाला है। यह अपने अहल को लेकर इस तरह लरज़ती है जिस तरह गहरे समन्दरों में तन्द व तेज़ हवाओं की ज़द पर किष्तियां, कुछ लोग ग़र्क़ और हलाक हो जाते हैं और कुछ मौजों के सहारे पर बाक़ी रह जाते हैं। तेज़ हवाएं उन्हें अपने दामन में लिये फ़िरती रहती हैं और अपनी हौलनाक मन्ज़िलों की तरफ़ ले जाती रहती हैं। जो ग़र्क़ हो गया वह दोबारा पाया नहीं जा सकता (हाथ नहीं आ सकता) और जो बच गया है उसका रास्ता हलाकत की ही तरफ़ जा रहा है।
बन्दगाने ख़ुदा! अभी बात को समझ लो और जबके ज़बानें आज़ाद हैं और बदन सही व सालिम हैं। आज़ा में लचक बाक़ी है और आने-जाने की जगह वसीअ और काम का मैदान तवील व अरीज़ है। क़ब्ल इसके के मौत नाज़िल हो जाए और अजल का फन्दा गले में पड़ जाए, अपने लिये मौत की आमद को यक़ीनी समझ लो और उसके आने का इन्तेज़ार न करो।