ख़ुत्बात
 
188- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(मुख़तलिफ़ उमूर की वसीयत करते हुए)


अय्योहन्नास! मैं तुम्हें वसीयत करता हूं तक़वा इलाही और नेमतों, एहसानात और फ़ज़ल व करम पर “ाुक्रे ख़ुदा करने की। देखो कितनी नेतमें हैं जो उसने तुम्हें इनायत की हैं और कितनी बुराइयों की मुकाफ़ात से अपनी रहमत के ज़रिये बचा लिया है। तुमने खुलकर गुनाह किये और उसने परदा पोषी की, तुमने काबिले मवाख़ेज़ा आमाल अन्जाम दिये और उसने तुम्हें मोहलत दे दी।
मैं तुम्हें वसीयत करता हूं के मौत को याद रखो और उससे ग़फ़लत न बरतो। आखि़र उससे कैसे ग़फ़लत कर रहे हो जो तुमसे ग़फ़लत करने वाली नहीं है। और फ़रिष्तए मौत से कैसे उम्मीद लगाए हो जो हरगिज़ मोहलत देने वाला नहीं है। तुम्हारी नसीहत के लिये वह मुर्दे ही काफ़ी हैं जिन्हें तुम देख चुके हो के किस तरह अपनी क़ब्रों की तरफ़ बग़ैर सवारी के ले जाए गए और किस तरह क़ब्र में उतार दिये गए के ख़ुद से उतरने के भी क़ाबिल नहीं थे। ऐसा मालूम होता है के उन्होंने कभी इस दुनिया को बसाया ही नहीं था और गोया के आखि़रत ही उनका हमेषगी का मकान है। वह जहां आबाद थे उसे वहषत कदा बना गए और जिससे वहषत खाते थे वहां जाकर आबाद हो गए। यह इसी में मषग़ूल रहे थे जिसको छोड़ना पड़ा और उसे बरबाद करते रहे थे जिधर जाना पड़ा। अब किसी बुराई से बचकर कहीं जा सकते हैं और न किसी नेकी में कोई इज़ाफ़ा कर सकते हैं। दुनिया से उन्स पैदा किया तो उसने धोका दे दिया और इस पर एतबार कर लिया तो उसने तबाह व बरबाद कर दिया।
ख़ुदा तुम पर रहमत नाज़िल करे, अब से सबक़त करो उन मनाज़िल की तरफ़ जिनको आबाद करने का हुक्म दिया गया है और जिनकी तरफ़ सफ़र करने की रग़बत दिलाई गई है और दावत दी गई है। अल्लाह की नेमतों की तकमील का इन्तेज़ाम करो उसकी इताअत के अन्जाम देने और मासियत से परहेज़ करने पर सब्र के ज़रिये। इसलिये के कल का दिन आज के दिन से दूर नहीं है। देखो दिन की साअतें, महीने के दिन, साल के महीने और ज़िन्दगी के साल किस तेज़ी से गुज़र जाते हैं।