ख़ुत्बात
 
184-आपका इरषादे गिरामी
(जो आपने बुर्ज में मसहरे ताई ख़ारेजी से फ़रमाया जब यह सुना के वह कह रहा है के ख़ुदा के अलावा किसी को फ़ैसले का हक़ नहीं है)


ख़ामोष हो जा। ख़ुदा तेरा बुरा करे ऐ टूटे हुए दांतों वाले। ख़ुदा “ााहिद है के जब हक़ का ज़हूर हुआ था उस वक़्त तेरी “ाख़्िसयत कमज़ोर और तेरी आवाज़ बेजान थी। लेकिन जब बातिल की आवाज़ बलन्द हुई तो तू बकरी की सींग की तरह उभर कर मन्ज़रे आम पर आ गया।


(((-यह एक ख़ारेजी “ााएर था जिसने मौलाए कायनात के खि़लाफ़ यह आवाज़ बलन्द की के आपने तहकीम को क़ुबूल करके ग़ैरे ख़ुदा को हकम बना दिया है और इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की हाकमीयत का कोई तसव्वुर नहीं है
हज़रत इमाम आलीमक़ाम (अ0) ने इस फ़ित्ने के दूररस असरात का लेहाज़ करके सख़्त तरीन लहजे में जवाब दिया और क़ाएल की औक़ात का एलान कर दिया के “ाख़्स बातिल परस्त और हक़ बेज़ार है। वरना उसे इस अम्र का अन्दाज़ा होता के किताबे ख़ुदा से फ़ैसला कराना ख़ुदा की हाकमीयत का इक़रार है इन्कार नहीं है। हाकमीयते ख़ुदा के मुन्किर अम्र व आस जैसे अफ़राद हैं जिन्होंने किताबे ख़ुदा को नज़र अन्दाज़ करके सियासी चालों से फ़ैसला कर दिया और दीने ख़ुदा को यकसर नाक़ाबिले तवज्जो क़रार दे दिया -)))