ख़ुत्बात
 
182- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा


नोफ़ बकाली से रिवायत की गई है के अमीरूल मोमेनीन (अ0) ने एक दिन कूफ़े में एक पत्थर पर खड़े होकर ख़ुत्बा इरषाद फ़रमाया जिसे जादह बिन हुबैरा मखज़ूमी ने नस्ब किया था और उस वक़्त आप उन का एक जबह पहने हुए थे और आपकी तलवार का पर तला भी लैफ़ ख़ुरमा का था और पैरों में लैफ़ ख़ुरमा ही की जूतियां थीं आप की पेषानी अक़दस पर सजदों के गट्टे नुमायां थे, फ़रमाया-
सारी तारीफ़ उस अल्लाह के लिये है जिसकी तरफ़ तमाम मख़लूक़ात की बाज़गष्त और जुमला उमूर की इन्तेहा है, मैं उसकी हम्द करता हूं, उसके अज़ीम एहसान, वाज़ेअ दलाएल और बढ़ते हुए फ़ज़ल व करम पर, वह हम्द जो उसके हक़ को पूरा कर सके और उसके “ाुक्र को अदा कर सके। उसके सवाब से क़रीब बना सके और नेमतों में इज़ाफ़ा का सबब बन सके। मैं उससे मदद चाहता हूं उस बन्दे की तरह जो उसके फ़ज़ल का उम्मीदवार हो, उसके मनाफ़ेअ का तलबगार हो उसके दफ़ाए बला का यक़ीन रखने वाला हो, उसके करम का एतराफ़ करने वाला हो और क़ौल व अमल में उस पर मुकम्मल एतमाद करने वाला हो।
मैं उस पर ईमान रखता हूं उस बन्दे की तरह जो यक़ीन के साथ उसका उम्मीदवार हो और ईमान के साथ उसकी तरफ़ मुतवज्जो हो, अज़आन के साथ उसकी बारगाह में सर-ब-सुजूद हो और तौहीद के साथ उससे इख़लास रखता हो, तमजीद के साथ उसकी अज़मत का इक़रार करता हो और रग़बत व कोषिष के साथ उसकी पनाह में आया हो।
वह पैदा नहीं किया गया है के कोई उसकी इज़्ज़त में “ारीक बन जाए और उसने किसी बेटे को पैदा नहीं किया है के ख़ुद हलाक हो जाए और बेटा वारिस हो जाए, न उससे पहले कोई ज़मान व मकान था और न उस पर कोई कमी या ज़्यादती तारी होती है। उसने अपनी मोहकम तदबीर और अपने हतमी फ़ैसले की बिना पर अपने को अक़लों के सामने बिल्कुल वाज़ेअ और नुमायां कर दिया है। इसकी खि़लक़त के “ावाहेदीन में उन आसमानों की तख़लीक़ भी है जिन्हें बग़ैर सुतून के रोक रखा है और बग़ैर किसी सहारे के क़ायम कर दिया है।


(((-बनी नाजिया का एक “ाख़्स जिसका नाम ख़रैत बिन राषिद था, अमीरूल मोमेनीन (अ0) के साथ सिफ़फ़ीन में “ारीक रहा और उसके बाद गुमराह हो गया, हज़रत से कहने लगा के मैं न आपकी इताअत करूंगा और न मैं आपके पीछे नमाज़ पढ़ूंगा, आपने सबब दरयाफ़्त किया? उसने कहा कल बताउंगा, और फिर आने के बजाय तीस अफ़राद को लेकर सहराओं में निकल गया और लूट-मार का काम “ाुरू कर दिया। एक अमीरूल मोमेनीन (अ0) के चाहने वाले मुसाफ़िर को सिर्फ़ हुब्बे अली (अ0) की बुनियाद पर काफ़िर क़रार देकर क़त्ल कर दिया और एक यहूदी को आज़ाद छोड़ दिया। हज़रत ने इसकी रोक थाम के लिये ज़ियाद बिन अबी हफ़सा को 130 अफ़राद के साथ भेजा, ज़ियाद ने चन्द अफ़राद को तहे तेग़ कर दिया और ख़रैत फ़रार कर गया और कुरदों को बग़ावत पर आमादा करने लगा। आपने माक़ल बिन क़ैस रियाही को दो हज़ार सिपाहियों के साथ रवाना किया, उन्होंने ज़मीने फ़ारस तक उसका पीछा किया यहांतक के तरफ़ैन में “ादीद जंग हुई और ख़रैत नोमान बिन सहयान को उसी के हाथों फ़ना के घाट उतार दिया गया और इस फ़ित्ने का ख़ात्मा हो गया।-)))


(ख़ुदावन्दे आलम ने उन्हें पुकरातो बग़ैर कसी सुस्ती और तौक़फ़ के इताअत व फ़रमाबरदारी करते हुए लब्बैक कह उठे। अगर वह उसकी रूबूबियत का इक़रार न करते और उसके सामने सरे इताअत न झुकाते तो वह उन्हें अपने अर्ष का मक़ाम और अपने फ़रिष्तों का मस्कन और पाकीज़ा कलमों और मख़लूक़ के नेक अमलों के बलन्द होने की जगह न बनाता। अल्लाह ने उनके सितारों को ऐसी रौषन निषानियां क़रार दिया है के जिनसे हैरान व सरगर्दां एतराफ़े ज़मीन की राहों में आने जाने के लिये रहनुमाई हासिल करते हैं, अन्धेरी रात की अन्धियारियों के स्याह परदे उनके नूर की ज़ौपाषियों को नहीं रोकते और न “ाबहाए तारीक की तीरगी के परदे यह ताक़त रखते हैं के वह आसमानों में फैली हुई चान्द के नूर की जगमगाहट को पलटा देंं पाक है वह ज़ात जिस पर पस्त ज़मीन के क़ितओं और बाहम मिले हुए स्याह पहाड़ों की च्यूटियों में अन्धेरी रात की अन्धयारियां और पुरसूकून “ाब की ज़ुलमतें पोषीदा नहीं हैं और न उफ़क़ आसमान में राद की गरज उससे मख़फ़ी है और न वह चीज़ें के जिन पर बादलों की बिजलियां कौंद कर नापैद हो जाती हैं और न वह पत्ते जो टूटकर गिरते है। के जिन्हें बारिष के नछत्रों की तन्द हवाएं और मूसलाधार बारिषें उनके गिरने की जगह से हटा देती हैं। वह जानता है के बारिष के क़तरे कहां गिरेंगे और कहां ठहरेंगे और छोटी च्यूटियां कहां रेंगेंगी और कहां अपने को खींच कर ले जाएंगी मच्छरों को कौन सी रोज़ी किफ़ायत करेगी और मादा अपने पेट में क्या लिये हुए है।
तमाम हम्द उस अल्लाह के लिये है जो अर्ष व कुर्सी ज़मीन व आसमान और जिन व इन्स से पहले मौजूद था। न इन्सानी वाहमों से उसे जाना जा सकता है और न अक़्ल व फ़हम से उसका अन्दाज़ा हो सकता है। उसे कोई सवाल करने वाला (दूसरे साएलों से) ग़ाफ़िल नहीं बनाता और न बख़्षिष व अता से उसके हां कुछ कमी आती है। वह आंखों से देखा नहीं जा सकता और न किसी जगह में उसकी हदबन्दी हो सकती है। न साथियों के साथ मुत्तसिफ़ किया जा सकता है और न आज़ाअ व जवारेह की हरकत से वह पैदा करता है और न हवास से वह जाना पहचाना जा सकता है और न इन्सानों पर उसका क़यास हो सकता है। वह ख़ुदा के जिसने बग़ैर आज़ाअ व जवारेह और बग़ैर कोयाई और बग़ैर हलक़ के कोवस को हिलाए हुए मूसा अलैहिस्सलाम से बातें कीं और उन्हें अपने अज़ीम निषानियां दिखाईं ऐ अल्लाह की तौसीफ़ में रन्ज व ताब उठाने वाले अगर तू (उससे ओहदा बरा होने में) सच्चा है तो पहले जिबराईल व मीकाईल और मुक़र्रब फरिष्तों के लाव लष्कर का वसफ़ बयान कर के जो पाकीज़गी व तहारत के हिजरवी में इस आलम में सर झुकाए पड़े हैं के उनकी अक़्लें “ाषदर व हैरान हैं के इस बेहतरीन ख़ालिक़ की तौसीफ़ कर सकें। सिफ़तों के ज़रिये वह चीज़ें जानी पहचानी जाती हैं जो “ाक्ल व सूरत और आज़ा व जवारेह रखती हूँ और व हके जो अपनी हदे इन्तेहा को पहुंच कर मौत के हाथों ख़त्म हो जाएं। उस अल्लाह के अलावा कोई माबूद नही ंके जिसने अपने नूर से तमाम तारीकियों को रोषन व मुनव्वर किया और ज़ुल्मत (अदम) से हर नूर को तीरा व तार बना दिया है। अल्लाह के बन्दों! मैं तुम्हें उस अल्लाह से डरने की वसीयत करता हूँ जिसने तुमको लिबास से ढांपा और हर तरह का सामाने मईषत तुम्हारे लिये मुहैया किया अगर कोई दुनियावी बक़ा की (बुलन्दियों पर) चड़ने का ज़ीना या मौत को दूर करने का रास्ता पा सकता होता तो वह सुलेमान इब्ने दाऊद (अ0) होते के जिनके लिये नबूवत व इन्तेहाए तक़र्रब के साथ जिन व इन्स की सल्तनत क़ब्ज़े में दे दी गई थी। लेकिन ज बवह अपना आबोदाना पूरा और अपनी मुद्दते (हयात) ख़त्म कर चुके तो फ़ना की कमानों ने उन्हें मौत के तीरों की ज़द पर रख लिया। घर उनसे ख़ाली हो गए और बस्तियां उजड़ गई और दूसरे लोग उनके वारिस हो गए। तुम्हारे लिये गुज़िष्ता दौरों (के हर दौर) में इबरतें (ही इबरतें) हैं (ज़रा सोचो) तो के कहां हैं अमालक़ा और उनके बेटे और कहां हैं फ़िरऔन और उनकी औलादें, और कहां हैं असहाबे अर्रस के “ाहरों के बाषिन्दे जिन्होंने नबियों को क़त्ल किया जो पैग़म्बर के रौषन तरीक़ों को मिटाया और ज़ालिमों के तौर तरीक़ों को ज़िन्दा किया, कहां हैं वह लोग जो लष्करों को लेकर बढ़े हज़ारों को षिकस्त दी और फ़ौजों को फ़राहम करके “ाहरों को आबाद किया।

इसी ख़ुत्बे के ज़ैल में फ़रमाया है वह हिकमत की सिपर पहने होगा और उसको उसके तमाम “ाराएत व आदाब के साथ हासिल किया होगा (जो यह हैं के) हमह तन इसकी तरफ़ मुतवज्जो हो उसकी अच्छी तरह षिनाख़्त हो और दिल (अलाएक़े दुनिया से) ख़ाली हो चुनान्चे वह उसके नज़दीक उसी की गुमषुदा चीज़ और उसी की हाजत व आरज़ू है के जिसका वह तलबगार व ख़्वास्तगार है। वह उस वक़्त (नज़रों से ओझल होकर) ग़रीब व मुसाफ़िर होगा के जब इस्लामे आलम ग़ुरबत में और मिस्ल उस ऊँट के होगा जो थकन से अपनी दुम ज़मीन पर मारता हो और गर्दन का अगला हिस्सा ज़मीन पर डाले हुए हो। वह अल्लाह की बाक़ीमान्दा हुज्जतों का बक़िया और अम्बिया के जानषीनों में से एक वारिस व जानषीन है। इसके बाद हज़रत ने फ़रमाया- ऐ लोगों! मैंने तुम्हें इसी तरह नसीहतें की हैं जिस तरह की अम्बिया अपनी उम्मतों को करते चले आए हैं और उन चीज़ों को तुम तक पहुंचाया है जो औसिया बाद वालों तक पहुंचाया किये हैं मैंने तुम्हें अपने ताज़ियाने से अदब सिखाना चाहा मगर तुम सीधे न हुए और ज़जर व तौबीह से तुम्हें हंकाया लेकिन तुम एकजा न हुए। अल्लाह तुम्हें समझे, क्या मेरे अलावा किसी और इमाम के उम्मीदवार हो जो तुम्हें सीधी राह पर चलाए और सही रास्ता दिखाए। देखो! दुनिया की तरफ़ रूख़ करने वाली चीज़ों ने जो रूख़ किये हुए थीं पीठ फिराई, और जो पीठ फिराए हुए थे उन्होंने रूख़ कर लिया। अल्लाह के नेक बन्दों ने (दुनिया से) कूच करने का तहैया कर लिया और फ़ना होने वाली थोड़ी सी दुनिया हाथ से देकर हमेषा रहने वाली बहुत सी आख़ेरत मोल ले ली। भला हमारे उनभाई बन्दों को कहा जिन के ख़ून सिफ़्फ़ीन में बहाए गए उससे क्या नुक़सान पहुंचा?)

आख़ेरत के अज्रे कसीर के मुक़ाबले में जो फ़ना होने वाला नहीं है, हमारे वह ईमानी भाई जिन का ख़ून सिफ़फ़ीन के मैदान में बहा दिया गया उनका नुक़सान हुआ है अगर वह आज ज़िन्दा नहीं हैं के दुनिया के मसाएब के घूंट पीएं और गन्दे पानी पर गुज़ारा करें, वह ख़ुदा की बारगाह में हाज़िर हो गए और उन्हें इनका मुकम्मल अज्र मिल गया, मालिक ने उन्हें ख़ौफ़ के बाद अमन की मन्ज़िल में वारिद कर दिया है।


कहां हैं मेरे वह भाई जो सीधे रास्ते पर चले और हक़ की राह पर लगे रहे। कहां हैं अम्मार? कहां हैं इब्ने इतेहान? कहां हैं ज़ुल मषहादीन? कहां हैं उनके जैसे ईमानी भाई जिन्होंने मौत का अहद व पैमान बान्ध लिया था और जिनके सर फ़ाजिरों के पास भेज दिये गए।
(यह कहकर आपने महासन “ारीफ़ पर हाथ रखा और तावीरे गिरया फ़रमाते रहे इसके बाद फ़रमाया)
आह! मेरे उन भाइयों पर जिन्होंने क़ुरान की तिलावत की तो उसे मुस्तहकम किया और फ़राएज़ पर ग़ौर व फ़िक्र किया तो उन्हें क़ायम किया (अदा किया), सुन्नतों को ज़िन्दा बनाया और बिदअतों को मुर्दा बनाया, उन्हें जेहाद के लिये बुलाया गया तो लब्बैक कही और अपने क़ाएद पर एतमाद किया तो उसका इत्तेबाअ भी किया।


(इसके बाद बुलन्द आवाज़ से पुकार कर फ़रमाया) जेहाद, जेहाद ऐ बन्दगाने ख़ुदा, आगाह हो जाओ के मैं आज अपनी फ़ौज तय्यार कर रहा हूं, अगर कोई ख़ुदा की बारगाह की तरफ़ जाना चाहता है तो निकलने के लिये तैयार हो जाए।


नोफ़ का बयान है के इसके बाद हज़रत ने दस हज़ार का लष्कर इमाम हसन (अ0) के साथ, दस हज़ार क़ैस बिन साद के साथ, दस हज़ार अबू अयूब अन्सारी के साथ और इसी तरह मुख़तलिफ़ तादाद में मुख़तलिफ़ अफ़राद के साथ तैयार किया और आपका मक़सद दोबारा सिफ़फ़ीन की तरह कूच करने का था लेकिन नौचन्दा जुमा आने से पहले ही आपको इब्ने मुल्जिम ने ज़ख़्मी कर दिया और इस तरह सारा लष्कर पलट गया और हम सब इन चैपायों की मानिन्द हो गये जिनका हंकाने वाला गुम हो जाए और उन्हें चारों तरफ़ से भेड़िये उचक लेने की फ़िक्रें हों।