ख़ुत्बात
 
166- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा


(दावते इत्तेहाद व इत्तेफ़ाक़)
तुम्हारे छोटों को चाहिये के अपने बड़ों की पैरवी करें और बड़ों का फ़र्ज़ है के अपने छोटों पर मेहरबानी करें और ख़बरदार तुम लोग जाहेलियत के इन ज़ालिमों जैसे न हो जाना जो न दीन का इल्म हासिल करते थे और न अल्लाह के बारे में अक़्ल व फ़हम से काम लेते थे। उनकी मिसाल अण्डों के छिलकों जैसी है जो “ाुतुरमुर्ग़ के अण्डे देने की जगह पर रखे हों के उनका तोड़ना तो जुर्म है लेकिन परवरिष करना भी सिवाए “ार के कोई नतीजा नहीं दे सकता है।


(एक और हिस्सा) यह लोग बाहेमी मोहब्बत के बाद अलग-अलग हो गए और अपनी असल से जुदा हो गए। बाज़ लोगों ने एक “ााख़ को पकड़ लिया है और अब उसी के साथ झुकते रहेंगे यहांतक के अल्लाह उन्हें बनी उमय्या के बदतरीन दिन के लिये जमा कर देगा जिस तरह के ख़रीफ़ में बादल के टुकड़े जमा हो जाते हैं फिर उनके दरम्यान मोहब्बत पैदा करेगा फिर उन्हें तह ब तह अब्र के टुकड़ों की तरह एक मज़बूत गिरोह बना देगा। फिर उनके लिये ऐसे दरवाज़ों को खोल देगा के यह अपने उभरने की जगह से “ाहरे सबा के दो बाग़ों के उस सैलाब की तरह बह निकलेंगे जिनसे न कोई चट्टान महफ़ूज़ रही थी और न कोई टीला ठहर सका था न पहाड़ की चोटी उसके धारे को मोड़ सकी थी और न ज़मीन की ऊंचाई। अल्लाह उन्हें घाटियों के नषेबों में मुतफ़र्रिक़ कर देगा और फिर उन्हें चष्मों के बहाव की तरह ज़मीन में फैला देगा।
उनके ज़रिये एक क़ौम के हुक़ूक़ दूसरी क़ौम से हासिल करेगा और एक जमाअत को दूसरी जमाअत के दयार में इक़्तेदार मुहैया करेगा। ख़ुदा की क़सम उनके इख़्तेदार व इख़्तेयार के बाद जो कुछ भी उनके हाथों में होगा वह इस तरह पिघल जाएगा जिस तरह के आग पर चर्बी पिघल जाती है।


(आखि़र ज़माने के लोग) अय्योहन्नास! अगर तुम हक़ की मदद करने में कोताही न करते और बातिल को कमज़ोर बनाने में सुस्ती का मुज़ाहिरा न करते तो तुम्हारे बारे में वह क़ौम तमअ न करती जो तुम जैसी नहीं है और तुम पर यह लोग क़वी न हो जाते, लेकिन अफ़सोस के तुम बनी इसराईल की तरह गुमराह हो गए और मेरी जान की क़सम मेरे बाद तुम्हारी यह हैरानी और सरगर्दानी दो चन्द हो जाएगी (कई गुना बढ़ जाएगी) चूंके तुमने हक़ को पसे पुष्त डाल दिया है। क़रीबतरीन से क़तए ताअल्लुक़ कर दिया है और दूर वालों से रिष्ता जोड़ लिया है। याद रखो के अगर तुम दाई हक़ का इत्तेबाअ कर लेते तो वह तुम्हें रसूले अकरम (स0) के रास्ते पर चलाता और तुम्हें कजरवी की ज़हमतों से बचा लेता और तुम उस संगीन बोझ को अपनी गर्दनों से उतारकर फेंक देते।