ख़ुत्बात
 
159- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें रिआया के साथ अपने हुस्ने सुलूक का ज़िक्र फ़रमाया है)


मैं तुम्हारे हमसाये में निहायत दरजए ख़ूबसूरती के साथ रहा और जहां तक मुमकिन हुआ तुम्हारी हिफ़ाज़त और निगेहदाष्त करता रहा और कजी ज़िल्लत की रस्सी और ज़ुल्म के फन्दों से आज़ाद कराया के मैं तुम्हारी मुख़्तसर नेकी का “ाुक्रिया अदा कर रहा था और तुम्हारी उन तमाम बुराईयों को जिन्हें मैंने देख लिया था उससे चष्म पोषी कर रहा था (जो मेरी आंखों के सामने और मेरी मौजूदगी में होती थीं)।