ख़ुत्बात
 
157- आपका इरषादे गिरामी

तमाम हम्द उस ख़ुदा के लिये है जिसने हम्द को अपने ज़िक्र का इफ़तेताहिया, अपने फ़ज़्ल व एहसान के बढ़ाने का ज़रिया और अपनी नेमतों और अज़मतों का दलीले राह क़रार दिया है।
ऐ अल्लाह के बन्दों! बाक़ी मान्दा लोगों के साथ भी ज़माने की वही रौषन रहेगी जो गुज़र जाने वाले के साथ थी। जितना ज़माना गुज़र चुका है वह पलट कर नहीं आएगा और जो कुछ उसमें है वह भी हमेषा रहने वाला नहीं, आखि़र में भी इसकी कारगुज़ारियां वही होंगी जो पहले रह चुकी हैं और इसके झण्डे एक दूसरे के अक़ब में हैं। गोया तुम क़यामत के दामन से वाबस्ता हो के वह तुम्हें धकेलकर इस तरह लिये जा रही है जिस तरह ललकारने वाला अपनी ऊंटनियों को, जो “ाख़्स अपने नफ़्स को संवारने के बजाए चीज़ों में पड़ जाता है वह तीरगियों में सरगर्दां और हलाकतों में फंसा रहता है और “ायातीन उसे सरकषियों में खींच कर ले जाते हैं और उसकी बदआमालियों को उसके सामने सज (सजा) देते हैं आगे बढ़ने वालों की आखि़री मंज़िल जन्नत है और अमदन कोताहियां करने वालों की हद जहन्नम है।
अल्लाह के बन्दों! याद रखो के तक़वा एक मज़बूत क़िला है और फ़िस्क़ व फ़ुजूर एक (कमज़ोर) चारदीवारी है के जो न अपने रहने वालों से तबाहियों को रोक सकती है और न उनकी हिफ़ाज़त कर सकती है। देखो तक़वा ही वह चीज़ है के जिससे गुनाहों का डंक काटा जाता है और यक़ीन ही से मुफ़तबाए मक़सद की कामरानियां हासिल होती हैं। ऐ अल्लाह के बन्दों। अपने नफ़्स के बारे में के जो तुम्हें तमाम नफ़्सों से ज़्यादा अज़ीज़ व महबूब है अल्लाह से डरो! उसने तुम्हारे लिये हक़ का रास्ता खोल दिया है और उसकी राहें उजागर कर दी हैं। अब या तो अनमिट बदबख़्ती होगी या दाएमी ख़ुष बख़्ती व सआदत, दारे फ़ानी से आलिमे बाक़ी के लिये तौषा मुहय्या कर लो, तुम्हें ज़ादे राह का पता दिया जा चुका है और कूच का हुक्म मिल चुका है और चल चलाओ के लिये जल्दी मचाई जा रही है, तुम ठहरे हुए सवारों के मानिन्द हो के तुम्हें यह पता नही ंके कब रवानगी का हुक्म दिया जाएगा, भला वह दुनिया को लेकर क्या करेगा जो आख़ेरत के लिये पैदा किया गया हो, और उस माल का क्या करेगा जो अनक़रीब उससे छिन जाने वाला है और उसका मज़लेमा व हिसाब उसके ज़िम्मे रहने वाला है।
अल्लाह के बन्दों! ख़ुदा ने जिस भलाई का वादा किया है उसे छोड़ा नहीं जा सकता और जिस बुराई से रोका है उसकी ख़्वाहिष नहीं की जा सकती। अल्लाह के बन्दों! उस दिन से डरो के जिसमें हमलों की जांच पड़ताल और ज़लज़लों की बोहतात होगी और बच्चे तक इसमें बूढ़े हो जाएंगे।
अल्लाह के बन्दों! यक़ीन रखो के ख़ुद तुम्हारा ज़मीर तुम्हारा निगेहबान और ख़ुद तुम्हारे आज़ा व जवारेह तुम्हारे निगरान हैं और तुम्हारे हमलों और सांसों की गिनती को सही-सही याद रखने वाले (करामा कातिबैन) हैं उनसे न अन्धेरी रात की अन्धयारियां छिपा सकती हैं और न बन्द दरवाज़े तुम्हें ओझल रख सकते हैं बिला “ाुबह आने वाला ‘‘कल’’ आज के दिन से क़रीब है।
‘‘आज का दिन’’ अपना सब कुछ लेकर जाएगा और ‘‘कल’’ उसके अक़ब में आया ही चाहता है। गोया तुममें से हर “ाख़्स ज़मीन के इस हिस्से पर के जहां तन्हाई की मन्ज़िल और गड्ढे का निषान (क़ब्र) है पहुंच चुका है और क़यामत तुम पर छा गई है और आख़ेरी फ़ैसला सुनने के लिये तुम (क़ब्रों से) निकल आए हो बातिल के परदे तुम्हारी आंखों से हटा दिये गये हैं और तुम्हारे हीले बहाने दब चुके हैं और हक़ीकतें तुम्हारे लिये साबित हो गई हैं और तमाम चीज़ें अपने-अपने मक़ाम की तरफ़ पलट पड़ी हैं, इबरतों से पन्द व नसीहत और ज़माने के उलटफेर से इबरत हासिल करो, और डराने वाली चीज़ों से फ़ायदा उठाओ।