ख़ुत्बात
 
144-आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें बअसत अम्बिया का तज़किरा किया गया है)


परवरदिगार ने मुरसेलीन कराम को मख़सूस वही से नवाज़ कर भेजा है और उन्हें अपने बन्दों पर अपनी हुज्जत बना दिया है ताके बन्दों की यह हुज्जत तमाम न होने पाए के उनके उज़्र का ख़ातेमा नहीं किया गया है। परवरदिगार ने इन लोगों को इसी लिसाने सिद्क़ के ज़रिये राहे हक़ की तरफ़ दावत दी है। इसे मख़लूक़ात का हाल मुकम्मल तौर से मालूम है वह न उनके छिपे हुए इसरार से बेख़बर है और न पोषीदा बातों से नावाक़िफ़ है जो उनके दिलों के अन्दर मख़फ़ी है। वह अपने एहकाम के ज़रिये इनका इम्तेहान लेना चाहता है के हुस्ने अमल के एतबार से कौन सबसे बेहतर है ताके जज़ा में सवाब अता करे और पादाष में मुब्तिलाए अज़ाब कर दे।


(अहलेबैत अलैहिस्सलाम) कहाँ हैं वह लोग जिनका ख़याल यह है के हमारे बजाय वही रासख़्ूान फ़िल इल्म हैं और यह ख़याल सिर्फ़ झूट और हमारे खि़लाफ़ बग़ावत से पैदा हुआ है के ख़ुदा ने हमें बलन्द बना दिया है और उन्हें पस्त रखा है। हमें कमालात इनायत फ़रमा दिये हैं और उन्हें महरूम रखा है। हमेंं अपनी रहमत में दाखि़ल कर दिया है और उन्हें बाहर रखा है। हमारे ही ज़रिये से हिदायत तलब की जाती है और अन्धेरों में रोषनी हासिल की जाती है। याद रखो क़ुरैष के सारे इमाम जनबा हाषिम की इसी किष्ते ज़ार में क़रार दिये गए हैं और यह अमानत न उनके अलावा किसी को ज़ेब देती है और न उनसे बाहर कोई इसका अहल हो सकता है।


(गुमराह लोग) इन लोगों ने हाज़िर दुनिया को इख़्तेयार कर लिया है और देर में आने वाली आख़ेरत को पीछे हटा दिया है। साफ़ पानी को नज़रअन्दाज़ कर दिया है और गन्दा पानी को पी लिया है। गोया के मैं उनके फ़ासिक़ को देख रहा हूँ जो मुनकिरात से मानूस हैं और बुराइयों से हमरंग व हमआहंग हो गया है, यहांतक के इसी माहौल में इसके सारे बाल सफ़ेद हो गए हैं और इसी रंग में इसके एख़लाक़ियात रंग गए हैं। इसके बाद एक सेलाब की तरह उठा है जिसे इसकी फ़िक्र नहीं है के इसको डुबो दिया है और भूसे की एक आग है जिसे इसकी परवाह नहीं है के क्या जला दिया है।
क्हां हैं वह अक़्लें जो हिदायत के चराग़ों से रोषनी हासिल करने वाली हैं और कहां हैं वह निगाहें जो मिनारए तक़वा की तरफ़ नज़र करने वाली हैं, कहां हैं वह दिल जो अल्लाह के लिये दिये गये हैं और इताअते ख़ुदा पर जम गए हैं। लोग तो माले दुनिया पर टूट पड़े हैं और हराम पर बाक़ायदा झगड़ा कर रहे हैं और जब जन्नत व जहन्नम का परचम बलन्द किया गया तो जन्नत की तरफ़ से मुँह को “ौतान ने दावत दी तो लब्बैक कहते हुए आ गए।