ख़ुत्बात
 
143 आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(तलबे बारिष के सिलसिले में)

याद रखो के जो ज़मीन तुम्हारा बोझ उठाए हुए है और जो आसमान तुम्हारे सर पर सायाफ़िगाँ है दोनों तुम्हारे रब के इताअतगुज़ार हैं और यह जो अपनी बरकतें तुम्हें अता कर रहे हैं तो उनका दिल तुम्हारे हाल पर नहीं कुढ़ रहा है।

और न यह तुमसे तक़र्रब चाहते हैं और न किसी ख़ैर के उम्मीदवार हैं। बात सिर्फ़ यह है के उन्हें तुम्हारे फ़ायदों के बारे में हुक्म दिया गया है तो यह इताअते परवरदिगार कर रहे हैं और उन्हें तुम्हारे मसालेह के हुदूद पर खड़ा कर दिया गया है तो खड़े हुए हैं।
याद रखो के अल्लाह बदआमालियों के मौक़े पर अपने बन्दों को उन मसाएब में मुब्तिला कर देता है के फल कम हो जाते हैं, बरकतें रूक जाती हैं, ख़ैरात के ख़ज़ानों के मुंह बन्द हो जाते हैं ताके तौबा करने वाला तौबा कर ले और बाज़ आ जाने वाला बाज़ आ जाए। नसीहत हासिल करने वाला नसीहत हासिल कर ले और गुनाहों से रूकने वाला रूक जाए। परवरदिगार ने अस्तग़फ़ार को रिज़्क़ के नुज़ूल और मख़लूक़ात पर रहमत के विरूद का ज़रिया क़रार दे दिया है। उसका इरषादे गिरामी है के ‘‘अपने रब से अस्तग़फ़ार करो के वह बहुत ज़्यादा बख़्षने वाला है। वह अस्तग़फ़ार के नतीजे में तुम पर मूसलाधार पानी बरसाएगा। तुम्हारी अमवाल और औलाद के ज़रिये मदद करेगा, तुम्हारे लिये बाग़ात और नहरें क़रार देगा।’’ अल्लाह उस बन्दे पर रहम करे जो तौबा की तरफ़ मुतवज्जे हो जाए, ख़ताओं से माफ़ी मांगे और मौत से पहले नेक आमाल कर ले।
ख़ुदाया हम परदों के पीछे और मकानात के गोषों से तेरी तरफ़ निकल पड़े हैं, हमारे बच्चे और जानवर सब फ़रयादी हैं। हम तेरी रहमत की ख़्वाहिष रखते हैं। तेरी नेमत के उम्मीदवार हैं और तेरे अज़ाब और ग़ज़ब से ख़ौफ़ज़दा हैं। ख़ुदाया हमें बाराने रहमत से सेराब कर दे और हमें मायूस बन्दों में क़रार न देना और न क़हत से हलाक कर देना और न हमसे उन आमाल का मुहासेबा करना जो हमारे जाहिलों ने अन्जाम दिये हैं। ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले!
ख़ुदाया हम तेरी तरफ़ उन हालात की फ़रयाद लेकर आए हैं जो तुझसे मख़फ़ी नहीं हैं और उस वक़्त निकले हैं जब हमें सख़्त तंगियों ने मजबूर कर दिया है और क़हत सालियों ने बेबस बना दिया है और “ादीद हाजत मन्दियों ने लाचार कर दिया है और दुष्वारियों व फ़ित्नों ने ताबड़तोड़ हमले कर रखे हैं। ख़ुदाया हमारी इल्तेमास यह है के हमें महरूम वापस न करना और हमें नामुराद न पलटाना। हमसे हमारे गुनाहों की बात न करना और हमारे आमाल का मुहासेबा न करना बल्के हम पर अपनी बारिष रहमत, अपनी बरकत, अपने रिज़्क़ और करम का दामन फैला दे और हमें ऐसी सेराबी अता फ़रमा जो तष्नगी को मिटाने वाली, सेर व सेराब करने वाली और सब्ज़ा उगाने वाली हो ताके जो खेतियां गई गुज़री हो गई हैं दोबारा उग आएं और जो ज़मीनें मुर्दा हो गई हैं वह ज़िन्दा हो जाएं। यह सेदाबी फ़ायदेमन्द और बेपनाह फलों वाली हो जिससे हमवार ज़मीनें सेराब हो जाएं और वादियां बह निकलें। दरख़्तों में पत्ते निकल आएं और बाज़ारी की क़ीमतें नीचे आ जाएं के तू हर “ौ पर क़ादिर है।