ख़ुत्बात
 
139- आपका इरषादे गिरामी
(षूरा के मौक़े पर)


(याद रखो) के मुझसे पहले हक़ की दावत देने वाला, सिलए रहम करने वाला और जूदो करम का मुज़ाहिरा करने वाला कोई न होगा। लेहाज़ा मेरे क़ौल पर कान धरा और मेरी गुफ़्तगू को समझो के अनक़रीब तुम देखोगे के इस मसले पर तलवारें निकल रही हैं। अहद व पैमान तोड़े जा रहे हैं और में से बाज़ गुमराहों के पेषवा हुए जा रहे हैं और बाज़ जाहिलों के पैरोकार।