ख़ुत्बात
 
120- आपका इरषादे गिरामी
(जिसमें अपनी फ़ज़ीलत का ज़िक्र करते हुए लोगों को नसीहत फ़रमाई है)


ख़ुदा की क़सम- मुझे पैग़ामे इलाही के पहुँचाने, वादाए इलाही के पूरा करने और कलेमाते इलाहिया की मुकम्मल वज़ाहत करने का इल्म दिया गया है। हम अहलेबैत (अ0) के पास हिकमतों के अबवाब और मसाएल की रौषनी मौजूद है, याद रखो, दीन की तमाम “ारीअतों का मक़सद एक है और उसके सारे रास्ते दुरूस्त हैं, जो इन रास्तों को इख़्तेयार कर लेगा वह मन्ज़िल तक पहुंच भी जाएगा और फ़ायदा भी हासिल कर लेगा और जो रास्ते ही में ठहर जाएगा वह बहक भी जाएगा और “ार्मिन्दा भी होगा। अमल करो उस दिन के लिये जिस के लिये ज़ख़ीरे फ़राहम किये जाते हैं और जिस दिन नीयतों का इम्तेहान होगा और जिसको अपनी मौजूद अक़्ल फ़ायदा न पहुँचाए उसे दूसरों की ग़ायब और दूरतरीन अक़्ल क्या फ़ायदा पहुंचा सकती है। इस आगणन से डरो जिसकी तपिष “ादीद, गहराई बईद, आराइष हदीद और पीने की “ौ सदीद (पीप) है। याद रखो, वह ज़िक्रे ख़ैर जो परवरदिगार किसी इन्सान के लिये बाक़ी रखता है वह उस माल से कहीँ ज़्यादा बेहतर होता है जिसे इन्सान उन लोगों के लिये छोड़ जाता है जो तारीफ़ तक नहीं करते हैं।