ख़ुत्बात
 
118-आपका इरषादे गिरामी
(अपने असहाब में नेक किरदार अफ़राद के बारे में)


तुम हक़ के सिलसिले में मददगार और दीन के मामले में भाई हो। जंग के रोज़ मेरी सिपर और तमाम लोगों में मेरे राज़दार हो। मैं तुम्हारे ही ज़रिया रूगरदानी करने वालों पर तलवार चलाता हूँ और रास्ते पर आने वालों की इताअत की उम्मीद रखता हूँ। लेहाज़ा ख़ुदारा मेरी मदद करो इस नसीहत के ज़रिये जिसमें मिलावट न हो और किसी तरह के “ाक व “ाुबहे की गुन्जाइष न हो के ख़ुदा की क़सम मैं लोगों की क़यादत के लिये तमाम लोगों से ऊला और अहक़ हूँ।