ख़ुत्बात
 
110-आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(अरकाने इस्लाम के बारे में)


अल्लाह वालों के लिये उसकी बारगाह ते पहुंचने का बेहतरीन वसीला अल्लाह और उसके रसूल (स0) पर ईमान और राहे ख़ुदा मेें जेहाद है के जेहाद इस्लाम की सरबलन्दी है, और कलमए इख़लास है के यह फ़ितरते इलाहिया है और नमाज़ का क़याम है के ऐन दीन है और ज़कात की अदायगी है के यह फ़रीज़ाए वाजिब है और माहे रमज़ान का रोज़ा है के यह अज़ाब से बचने का सिपर है और हज बैतुल्लाह है और उमरा है के यह फ़क्ऱ को दूर कर देता है और गुनाहों को धो देता है और सिलए रहम है के यह माल में इज़ाफ़ा और अजल के टालने का ज़रिया है और पोषीदा तरीक़े से ख़ैरात है के यह गुनाहों का कफ़्फ़ारा है और अलल एलान सदक़ा है के यह बदतरीन मौत के दफ़ा करने का ज़रिया है और अक़रेबा के साथ नेक सुलूक है के यह ज़िल्लत के मक़ामात से बचाने का वसीला है।
ज़िक्रे ख़ुदा की राह में आगे बढ़ते रहो के यह बेहतरीन ज़िक्र है और ख़ुदा ने मुत्तक़ीन से जो वादा किया है उसकी तरफ़ रग़बत पैदा करो के इसका वादा सच्चा है। अपने पैग़म्बर की हिदायत के रास्ते पर चलो के यह बेहतरीन हिदायत है और उनकी सुन्नत को इख़्तेयार करो के यह सबसे बेहतर हिदायत करने वाली है। (क़ुराने करीम) क़ुराने मजीद का इल्म हासिल करो के यह बेहतरीन कलाम है और इसमें ग़ौर व फ़िक्र करो के यह दिलों की बहार है। इसके नूर से षिफ़ा हासिल करो के यह दिलों के लिये षिफ़ा है और इसकी बाक़ायदा तिलावत करो के यह मुफ़ीदतरीन क़िस्सों का मरकज़ है, और याद रखो के अपने इल्म के खि़लाफ़ अमल करने वाला आलिम भी हैरान व सरगर्दां जाहिल जैसा है जिसे जेहालत से कभी ओफ़ाक़ा नहीं होता है बल्कि इस पर हुज्जते ख़ुदा ज़्यादा अज़ीमतर होती है और इसके लिये हसरत व अन्दोह भी ज़्यादा लाज़िम होता है और वह बारगाहे इलाही में ज़्यादा क़ाबिले मलामत होता है।