ख़ुत्बात
 

107- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(सिफ़्फ़ीन की जंग के दौरान)



मैंने तुम्हें भागते हुए और अपनी सफ़ों से मुन्तषिर होते हुए देखा जबके तुम्हें “ााम के जफ़ाकार ओबाष और देहाती बद्दू अपने घेरे में लिये हुए थे हालांके तुम अरब के जवाँमर्द बहादुर और “ारफ़ के रासवरीं थे। मगर इसकी ऊंची नाक और चोटी की बलन्दी वाले अफ़राद थे, मेरे सीने की कराहने की आवाज़ें उस वक़्त दब सकती हैं जब मैं यह देख लूं के तुम उन्हें इसी तरह अपने घेरे में लिये हुए हो जिस तरह वह तुम्हें लिये हुए थे और उनको उनके मवाक़िफ़ से इसी तरह ढकेल रहे हों जिस तरह उन्होंने तुम्हें हटा दिया था के उन्हें तीरों की बौछार का निषाना न बनाए हुए हो और नैज़ों की ज़द पर इस तरह लिये हुए हो के पहली सफ़ को आख़री सफ़ पर उलट रहे हो जिस तरह के प्यासे ऊंट हंकाए जाते हैं जब उन्हें तालाबों से दूर फेंक दिया जाता है और घाट से अलग कर दिया जाता है।