ख़ुत्बात
 
105- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा

(जिसमें रसूले अकरम (स0) के औसाफ़, बनी उमय्या की तहदीद और लोगों की नसीहत का तज़किरा किया गया है।)



(रसूले अकरम (स0) - यहाँ तक के परवरदिगार ने हज़रत मोहम्मद (स0) को उम्मत के आमाल का गवाह, सवाब की बषारत देने वाला, अज़ाब से डराने वाला बनाकर भेज दिया। आप बचपने में बेहतरीन मख़लूक़ात और सिन रसीदा होने पर अषरफ़े कायनात थे, आदात के एतबार से तमाम पाकीज़ा अफ़राद से ज़्यादा पाकीज़ा और बाराने रहमत के एतबार से हर सहाब रहमत से ज़्यादा करीम व जवाद थे।

(बनी उमय्या) - यह दुनिया तुम्हारे लिये उसी वक़्त अपनी लज़्ज़तों समेत ख़ुषगवार बनी है और तुम उसके फ़वाएद हासिल करने के क़ाबिल बने हो जब तुमने देख लिया के इसकी मेहार झूल रही है और इसका तंग ढीला हो गया है। इसका हराम एक क़ौम के नज़दीक बग़ैर कांटे वाली बेर की तरह मज़ेदार हो गया है और इसका हलाल बहुत दूर तक नापसन्द हो गया है और ख़ुदा की क़सम तुम इस दुनिया को एक मुद्दत तक फैले हुए साये की तरह देखोगे के ज़मीन हर टोकने वाले से ख़ाली हो गई है और तुम्हारे हाथ खुल गए हैं और क़ाएदीन के हाथ बन्धे हुए हैं। तुम्हारी तलवारें उनके सरों पर लटक रही हैं और उनकी तलवारें न्याम में हैं लेकिन याद रखो के हर ख़ून का एक इन्तेक़ाम लेने वाला और हर हक़ का एक तलबगार होता है और हमारे ख़ून का मुन्तक़िम गोया ख़ुद अपने हक़ में फै़सला करने वाला है और वह, वह परवरदिगार है जिसे कोई मतलूबे आजिज़ नहीं कर सकता है और जिससे कोई फ़रार करने वाला भाग नहीं सकता है। मैं ख़ुदा की क़सम खाकर कहता हूँ के बनी उमय्या के अनक़रीब तुम इस दुनिया को अग़्यार के हाथों और दुष्मनों के दयार में देखोगे, आगाह हो जाओ के बेहतरीन नज़र वह है जो ख़ैर में डूब जाए और बेहतरीन कान वह है जो नसीहत को सुन लें और क़ुबूल कर लें।

(मोअज़ा) लोग! एक बाअमल नसीहत करने वाले के चिराग़े हिदायत से रोषनी हासिल कर लो और एक ऐसे साफ़ चष्मे से सेराब हो जाओ जो हर आलूदगी से पाक व पाकीज़ा है।



(((- इस ख़ुत्बे में इस नुक्ते की तरफ़ भी इषारा हो सकता है के ग़ासिब अफ़राद ने जिन अमवाल को हज़म कर लिया है, वह एक दिन इनका षिकम चाक करके इसमें से निकाल लिया जाएगा और इस अम्र की तरफ़ भी इषारा हो सकता है के हक़ अभी फ़ना नहीं हुआ है। उसे बातिल ने दबा दिया है और गोया के अपने षिकम के के अन्दर छिपा लिया है और मुझमें इस क़दर ताक़त पाई जाती है के मैं इस षिकम को चाक करके इस हक़ को मन्ज़रे आम पर ले आऊं और बातिल के हर राज़ को बेनक़ाब कर दूँ।-)))



अल्लाह के बन्दों! देखो अपनी जेहालत की तरफ़ झुकाव मत पैदा करो और अपनी ख़्वाहिषात के ग़ुलाम न बन जाओ के इस मन्ज़िल पर आ जाने वाला गोया सेलाबज़दा दीवार के किनारे पर खड़ा है और हलाकतों को अपनी पुष्त पर लादे हुए इधर से उधर मुन्तक़िल हो रहा है। इन उफ़्कार की बिना पर जो यके बाद दीगरे ईजाद करता रहेगा और उन पर ऐसे दलाएल क़ाएम करेगा जो हरगिज़ जस्पां ना होंगे और उससे क़रीबतर भी न होंगे। लेहाज़ा ख़ुदा का ख़याल रखो के अपनी फ़रयाद उस “ाख़्स से करो जो उसका एज़ाला न कर सके और अपनी राय से हुक्मे इलाही को तोड़ न सके। याद रखो के इमाम की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ वह है जो परवरदिगार ने इसके ज़िम्मे रखी है के बलीग़तरीन मोअज़्ज़म करे, नसीहत की कोषिष करे। सुन्नत को ज़िन्दा करे, मुस्तहक़ीन पर हुदूद का इजरा करे और हक़दारों तक मीरास के हिस्से पहुँचा दे।
देखो इल्म की तरफ़ सबक़त करो क़ब्ल इसके के इसका सब्ज़ा ख़ुष्क हो जाए और तुम उसे साहेबाने इल्म से हासिल करने में अपने कारोबार में मषग़ूल हो जाओ, मुन्करात से रोको और ख़ुद भी बचो के तुम्हें रोकने का हुक्म रूकने के बाद दिया गया है।