ख़ुत्बात
 
103-आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(ज़ोहद के बारे में)


अय्योहन्नास! दुनिया की तरफ़ इस तरह देखो जैसे वह लोग देखते हैं जो ज़ोहद रखने वाले और उससे नज़र बचाने वाले होते हैं के अनक़रीब यह अपने साकिनों को हटा देगी और अपने ख़ुषहालों को रन्जीदा कर देगी। इसमें जो चीज़ मुंह फेरकर जा चुकी वह पलट कर आने वाली नहीं है और जो आने वाली है उसका हाल नहीं मालूम है के इसका इन्तेज़ार किया जाए। इसकी ख़ुषी रन्ज से मख़लूत है और इसमें मर्दों की मज़बूती ज़ोफ़ व नातवानी की तरफ़ माएल है। ख़बरदार इसकी दिल लुभाने वाली चीज़ें तुम्हें धोके में न डाल दे ंके इसमें से साथ जाने वाली चीज़ें बहुत कम हैं।
ख़ुदा रहमत नाज़िल करे उस “ाख़्स पर जिसने ग़ौर व फ़िक्र किया तो इबरत हासिल की और इबरत हासिल की तो बसीरत पैदा कर ली के दुनिया की हर मौजूद “ौ अनक़रीब ऐसी हो जाएगी जैसे थी ही नहीं और आख़ेरत की चीज़ें इस तरह हो जाएंगी जैसे अभी मौजूद हैं। हर गिनती में आने वाला कम होने वाला है और हर वह “ौ जिसकी उम्मीद हो वह अनक़रीब आने वाली है और जो आने वाला है वह गोया के क़रीब और बिल्कुल क़रीब है।
(सिफ़ते आलिम) आलिम वह है जो अपनी क़द्र ख़ुद पहचाने और इन्सान की जेहालत के लिये इतना ही काफ़ी है के वह अपनी क़द्र को न पहचाने। अल्लाह की निगाह में बदतरीन बन्दा वह है जिसे उसने उसी के हवाले कर दिया हो के वह सीधे रास्ते से हट गया है और बग़ैर रहनुमा के चल रहा है।


(((- हक़ीक़ते अम्र यह है के इन्सान अपनी क़द्र व औक़ात को पहचान लेता है तो उसका किरदार ख़ुद-ब-ख़ुद सुधर जाता है और इस हक़ीक़त से ग़ाफ़िल हो जाता है तो कभी क़द्र व मन्ज़िलत से ग़फ़लत दरबारदारी, ख़ुषामद, मदहे बेजा, ज़मीर फ़रोषी पर आमादा कर देती है के इल्म को माल व जाह के एवज़ बेचने लगता है और कभी औक़ात से नावाक़फ़ीयत मालिक से बग़ावत पर आमादा कर देती है के अवामुन्नास पर हुकूमत करते-करते मालिक की इताअत का जज़्बा भी ख़त्म हो जाता है और एहकामे इलाही को भी अपनी ख़्वाहिषात के रास्ते पर चलाना चाहता है जो जेहालत का बदतरीन मुज़ाहिरा है और इसका इल्म से कोई ताल्लुक़ नहीं है-!)))


ऐ दुनिया के कारोबार की दावत दी जाए तो अमल पर आमादा हो जाता है और आख़ेरत के काम की दावत दी जाए तो सुस्त हो जाता है। गोया के जो कुछ किया है वही वाजिब था और जिसमें सुस्ती बरती है वह उससे साक़ित है।
(आखि़र ज़माना) वह ज़माना ऐसा होगा जिसमें सिर्फ़ वही मोमिन निजात पा सकेगा जो गोया के सो रहा होगा के मजमे में आए तो लोग उसे पहचान न सकें और ग़ाएब हो जाए तो कोई तलाष न करे। यही लोग हिदायत के चिराग़ और रातों के मुसाफ़िरों के लिये निषान मन्ज़िल होंगे न इधर उधर लगाते फिरेंंगे और न लोगों के उयूब की इषाअत करेंगे। उनके लिये अल्लाह रहमत के दरवाज़े खोल देगा और उनसे अज़ाब की सख़्ितयों को दूर कर देगा।
लोगों! अनक़रीब एक ज़माना आने वाला है जिसमें इस्लाम को इसी तरह उलट दिया जाएगा जिस तरह बरतन को उसके सामान समेत उलट दिया जाता है। लोगों! अल्लाह ने तुम्हें इस बात से पनाह दे रखी है के वह तुम पर ज़ुल्म करे लेकिन तुम्हें इस बात से महफ़ूज़ नहीं रखा है के तुम्हारा इम्तेहान न करे। इस मालिके जल्लाजलालोह ने साफ़ एलान कर दिया है के ‘‘इसमें हमारी खुली हुई निषानियां हैं और हम बहरहाल तुम्हारा इम्तेहान लेने वाले हैं’’
सय्यद “ारीफ़ रज़ी - मोमिन के नौमए (ख़्वाबीदा) होने का मतलब इसका गुमनाम और बेषर होना है और मसायीह, मिस्याह की जमा है और वह वह “ाख़्स है के जिसे किसी का ऐब मालूम हो जाए तो उसकी इषाअत के बग़ैर चैन न पड़े। बुज़ुर-बुज़दर की जमा है यानी वह “ाख़्स जिसकी हिमाक़त ज़यादा है और उसकी गुफ़्तगू लग़्िवयात पर मुष्तमिल हो।