101- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा (जो उन ख़ुत्बों में है जिनमें हवादिस ज़माना का ज़िक्र किया गया है) सारी तारीफ़ उस अव्वल के लिये हैं जो हर एक से पहले है और उस आखि़र के लिये है जो हर एक के बाद है। उसकी अव्वलीयत का तक़ाज़ा है के उसका अव्वल न हो और इसकी आखि़रत का तक़ाज़ा है के इसका कोई आखि़र न हो। मैं गवाही देता हूँ के उसके अलावा कोई ख़ुदा नहीं है और इस गवाही में मेरा बातिन ज़ाहिर के मुताबिक़ है और मेरी ज़बान दिल से मुकम्मल तौर पर हमआहंग है। (((-उससे मुराद ख़ुद हज़रत अली (अ0) की ज़ाते गिरामी है जिसे हक़ का महवर व मरकज़ बनाया गया है और जिसके बारे में रसूले अकरम (स0) की दुआ है के मालिक हक़ को उधर-उधर फेर दे जिधर-जिधर अली (अ0) मुड़ रहे हों (सही तिरमिज़ी) और बाद के फ़िक़रात में आले मोहम्मद (अ0) के दीगर अफ़राद की तरफ़ इषारा है जिनमें मुस्तक़बिल क़रीब में इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ0) और इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ0) का दौर था जिनकी तरफ़ अहले दुनिया ने रूजू किया और उनकी सियासी अज़मत का भी एहसास किया और मुस्तक़बिल बईद में इमाम मेहदी (अ0) का दौर है जिनके हाथों उम्मत का इन्तेषार दूर होगा और इस्लाम पलटकर अपने मरकज़ पर आ जाएगा। ज़ुल्म व जौर का ख़ात्मा होगा और अद्ल व इन्साफ़ का निज़ाम क़ायम हो जाएगा-))) अय्योहन्नास! ख़बरदार मेरी मुख़ालफ़त की ग़लती न करो और मेरी नाफ़रमानी करके हैरान व सरगर्दान न हो जाओ और मेरी बात सुनते वक़्त एक-दूसरे को इषारे न करो के उस परवरदिगार की क़सम जिसने दाने को षिगाफ़्ता किया है और नुफ़ूस को ईजाद किया है के मैं जो कुछ ख़बर दे रहा हूँ वह रसूले उम्मी की तरफ़ से है जहां न पहुंचाने वाला ग़लत गो था और न सुनने वाला जाहिल था और गोया के मैं उस बदतरीन गुमराह को भी देख रहा हूँ जिसने “ााम में ललकारा और कूफ़े के एतराफ़ में अपने झण्डे गाड़ दिये और उसके बाद जब इसका दहाना खुल गया और उसकी लगाम का दहाना मज़बूत हो गया और ज़मीन में उसकी पामालियां सख़्ततर हो गई तो फ़ितने अबनाए ज़माना को अपने दांतों से काटने लगे और जंगों ने अपने थपेड़ों की लपेट में ले लिया और दिनों की सख़्ितयां और रातों की जराहतें मन्ज़रे आम पर आ गईं और फिर जब इसकी खेती तैयार होकर अपने पैरों पर खड़ी हो गई और इसकी सरमस्तियां अपना जोष दिखलाने लगीं और तलवारें चमकने लगीं तो सख़्त तरीन फ़ितनों के झण्डे गाड़ दिये गए और वह तारीक रात और तलातुम ख़ेज़ समन्दर की तरह मन्ज़रे आम पर आ गए, और कूफ़े को इसके अलावा भी कितनी ही आन्धियां पारा-पारा करने वाली हैं और उस पर से कितने ही झक्कड़ गुज़रने वाले हैं और अनक़रीब वहां जमाअतें जमाअतों से गुथने वाली हैं और खड़ी खेतियां काटी जाने वाली हैं और कटे हुए माहसल को भी तबाह व बरबाद किया जाएगा।