ख़ुत्बात  
  93- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें आपने अपने इल्म व फ़ज़्ल से आगाह करते हुए बनी उमय्या के फ़ित्ने की तरफ़ मुतवज्जो किया है।)


हम्द व सनाए परवरदिगार के बाद- लोगों! याद रखो मैंने फ़ित्ने की आंख को फोड़ दिया है और यह काम मेरे अलावा कोई दूसरा अन्जाम नहीं दे सकता है जबके इसकी तारीकियां तहोबाला हो रही हैं और उसकी दीवानगी का मर्ज़ “ादीद हो गया है। अब तुम मुझसे जो चाहो दरयाफ़त कर लो क़ब्ल इसके के मैं तुम्हारे दरम्यान न रह जाऊँ। उस परवरदिगार की क़सम जिसके क़ब्ज़ए क़ुदरत में मेरी जान है तुम अब से क़यामत तक के दरम्यान जिस चीज़ के बारे में सवाल करोगे और जिस गिरोह के बारे में दरयाफ़्त करोगे जो सौ अफ़राद को हिदायत दे और सौ को गुमराह कर दे तो मैं उसके ललकारने वाले, खींचने वाले, हंकान वाले, सवारियों के क़याम की मंज़िल, सामान उतारने की जगह, कौन इनमें से क़त्ल किया जाएग, कौन अपनी मौत से मरेगा। सब बता दूंगा। हालांके अगर यह बदतरीन हालात और सख़्त तरीन मुष्किलात मेरे बाद पेष आए तो दरयाफ़्त करने वाला भी परेषानी से सर झुका लेगा और जिससे दरयाफ़्त किया जाएगा वह भी बताने से आजिज़ रहेगा और यह सब उस वक़्त होगा जब तुम पर जंगें पूरी तैयारी के साथ टूट पड़ेंगी और दुनिया इस तरह तंग हो जाएगी के मुसीबत के दिन तुलानी महसूस होने लगेंगे। यहांतक के अल्लाह बाक़ीमान्दा नेक बन्दों को कामयाबी अता कर दे।
याद रखो फ़ितनेज ब आते हैं तो लोगों को “ाुबहात में डाल देते हैं और जब जाते हैं तो होषियार कर जाते हैं। यह आते वक़्त नहीं पहचाने जाते हैं लेकिन जब जाने लगते हैं तो पहचान लिये जाते हैं, हवाओं की तरह चक्कर लगाते रहते हैं। किसी “ाहर को अपनी ज़द में ले लेते हैं और किसी को नज़रअन्दाज़ कर देते हैं। याद रखो। मेरी निगाह में सबसे ख़ौफ़नाक फ़ितना बनी उमय्या का है जो ख़ुद भी अन्धा होगा और दूसरों को भी अन्धेरे में रखेगा। उसके ख़ुतूत आम होंगे लेकिन इसकी बला ख़ास लोगों के लिये होगी जो इस फ़ित्ने में आंख खोले होंगे और न अन्धों के पास से बा आसानी गुज़र जाएगा
ख़ुदा की क़सम! तुम बनी उमय्या को मेरे बाद बदतरीन साहेबाने इक़तेदार पाओगे जिनकी मिसाल उस काटने वाली ऊंटनी की होगी जो मुंह से काटेगी और हाथ मारेगी या पांव चलाएगी और दूध न दूहने देगी और यह सिलसिला यूँ ही बरक़रार रहेगा जिससे सिर्फ़ वह अफ़राद बख़्षेंगे जो इनके हक़ में मुफ़ीद हों या कम से कम नुक़सानदेह न हों। यह मुसीबत तुम्हें इसी तरह घेरे रहेगी यहाँ तक के तुम्हारी दाद ख़्वाही ऐसे ही होगी जैसे ग़ुलाम अपने आक़ा से या मुरीद अपने पीर से इन्साफ़ का तक़ाज़ा करे।


((( पैग़म्बरे इस्लाम (स0) के इन्तेक़ाल के बाद जनाज़ाए रसूल (स0) को छोड़कर मुसलमानों की खि़लाफ़त साज़ी, खि़लाफ़त के बाद अमीरूल मोमेनीन (अ0) से मुतालेब-ए-बैयत, अबू सुफ़यान की तरफ़ से हिमायत की पेषकष, फ़िदक का ग़ासेबाना क़ब्ज़ा, दरवाज़े का जलाया जाना, फिर अबूबक्र की तरफ़ से उमर की नामज़दगी, फिर उमर की तरफ़ से “ाूरा के ज़रिये उस्मान की खि़लाफ़त, फिर तलहा व ज़ुबैर और आइषा की बग़ावत और फिर ख़वारिज का दीन से ख़ुरूज। यह वह फ़ित्ने थे जिनमें से कोई एक भी इस्लाम को तबाह कर देने के लिये काफ़ी था। अगर अमीरूल मोमेनीन (अ0) ने मुकम्मल सब्र व तहम्मुल का मुज़ाहेरा न किया होता और सख़्त तरीन हालात पर सुकूत इख़्तेयार न फ़रमाया होता। इसी सुकूत और तहम्मुल को फ़ित्नों की आंख फोड़ देने से ताबीर किया गया है और इसके बाद इल्मी फ़ित्नों से बचने का एक रास्ता यह बता दिया गया है के जो जाहो दरयाफ़्त कर लो, मैं क़यामत तक के हालात से बाख़बर कर सकता हूँ। (रूहीलहल फ़िदाअ) )))


तुम पर इनका फ़ित्ना ऐसी भयानक “ाक्ल में वारिद होगा जिससे डर लगेगा और इसमें जाहेलीयत के अजज़ा होंगे, न कोई मिनारए हिदायत होगा और न कोई रास्ता दिखाने वाला परचम।
बस हम अहलेबैत (अ0) हैं जो इस फ़ित्ने से महफ़ूज़ रहेंगे और इसके दाइयों में से न होंगे, इसके बाद अल्लाह तुमसे इस फ़ित्ने को इस तरह अलग कर देगा, जिस तरह जानवर की खाल उतारी जाती है। इस “ाख़्स के ज़रिये उन्हें ज़लील करेगा और सख़्ती से हंकाएगा और मौत के तल्ख़ घूंट पिलाएगा और तलवार के अलावा कुछ न देगा और ख़ौफ़ के अलावा कोई लिबास न पहनएगा। वह वक़्त होगा जब क़ुरैष को यह आरज़ू होगी के काष दुनिया और उसकी तमाम दौलत देकर एक मन्ज़िल पर मुझे देख लेते चाहे सिर्फ़ इतनी ही देर के लिये जितनी देर में एक ऊँट नहर किया जाता है ताके मैं उनसे इस चीज़ को क़ुबूल कर लूं जिसका एक हिस्सा आज मांगता हूँ तो वह देने के लिये तैयार नहीं हैं।