ख़ुत्बात  
  90- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें माबूद के क़ेदम और उसकी मख़लूक़ात की अज़मत का तज़किरा करते हुए मोअज़ पर इख़्तेताम किया गया है।)


सारी तारीफ़ें उस अल्लाह के लिये हैं जो बग़ैर देखे मारूफ़ है और बग़ैर सोचे पैदा करने वाला है। वह हमेषा से क़ायम और दायम है जब न यह बुर्जों वाले आसमान थे और न बलन्द दरवाज़ों वाले हेजाबात, न अन्धेरी रात थी और न ठहरे हुए समन्दर, न लम्बे चैड़े रास्तों वाले पहाड़ थे और न टेढ़ी तिरछी पहाड़ी राहें, न बिछे हुए फ़र्ष वाली ज़मीन थी और न किसी बल वाली मख़लूक़ात, वही मख़लूक़ात का ईजाद करने वाला है और वही आखि़र में सबका वारिस है। वही सबका माबूद है और सबका राज़िक़ है। “ाम्स व क़मर इसकी मर्ज़ी से मुसलसल हरकत में हैं के हर नए को पुराना कर देते हैं और हर बईद को क़रीबतर बना देते हैं।
उसी ने सबके रिज़्क़ को तक़सीम किया है और सबके आसार व आमाल का अहसाए किया है। उसी ने हर एक की सांसों का “ाुमार किया है और हर एक की निगाह की ख़यानत और सीने के पीछे छुपे हुए इसरार और इसलाब व अरहाम में इनके मराकज़ का हिसाब रखता है यहाँ तक के वह अपनी आखि़री मन्ज़िल तक पहुंच जाएं। वही वह है जिसका ग़ज़ब दुष्मनों पर उसकी वुसअते रहमत के बावजूद “ादीद है और उसकी रहमत इसके दोस्तों के लिये इसके षिद्दते ग़ज़ब के बावजूद वसीअ है जो इस पर ग़लबा पैदा करना चाहते हैं।उसके हक़ में क़ाहिर है और जो कोई इससे झगड़ा करना चाहे उसके हक़ में तबाह करने वाला है। हर मुख़ालेफ़त करने वाले का ज़लील करने वाला और हर दुष्मनी करने वाले पर ग़ालिब आने वाला है। जो इस पर तवक्कल करता है उसके लिये काफ़ी हो जाता है और जो उससे सवाल करता है उसे अता कर देता है। जो उसे क़र्ज़ देता है उसे अदा कर देता है और जो इसका “ाुक्रिया अदा करता है उसको जज़ा देता है।
बन्दगाने ख़ुदा, अपने आप को तौल लो, क़ब्ल इसके के तुम्हारा वज़न किया जाए और अपने नफ़्स का मुहासेबा कर लो क़ब्ल इसके के तुम्हारा हिसाब कर लिया जाए। गले का फन्दा तंग होने से पहले सांस ले लो और ज़बरदस्ती ले जाए जाने से पहले अज़ ख़ुद जाने के लिये तैयार हो जाओ और याद रखो के जो “ाख़्स ख़ुद अपने नफ़्स की मदद करके उसे नसीहत और तम्बीह नहीं करता है उसको कोई दूसरा न नसीहत कर सकता है अैर न तम्बीह कर सकता है।
(((यूँ तो परवरदिगार की किसी सिफ़त और उसके किसी कमाल में इसका कोई मिस्लो नज़ीर या “ारीक व वज़ीर नहीं है लेकिन इन्सानी ज़िन्दगी के लिये ख़ुसूसियत के साथ यह जार सिफ़ात इन्तेहाई अहम हैंः
1. वह अपने ऊपर एतमाद करने वालों के लिये काफ़ी हो जाता है और उन्हें दूसरों का दोस्त निगर नहीं बनने देता है।
2. वह हर सवाल करने वाले को अता करता है और किसी तरह की तफ़रीक़ का क़ायल नहीं है बल्कि हक़ीक़त यह है के सवाल न करने वालों को भी अता करता है।
3. वह हर क़र्ज़ को अदा कर देता है हालांके हर क़र्ज़ देने वाला उसी के दिये हुए माल में से क़र्ज़ देता है और उसी की राह में ख़र्च करता है।
4. वह “ाुक्रिया अदा करने वालों को भी इनाम देता है जबके वह अपने फ़रीज़े को अदा करते हैं और कोई नया कारे ख़ैर अन्जाम नहीं देते हैं। यह और बात है के उन लोगों को भी इस बात का ख़याल रखना चाहिए के इस बात का “ाुक्रिया न अदा करें के हमें दिया है और ‘‘दूसरों को नहीं दिया है’’ के यह इसके करम की तौहीन है “ाुक्रिया यह नहीं है। “ाुक्रिया इस बात का है के हमें यह नेमत दी है। अगरचे दूसरों को भी मसलहत के मुताबिक़ दूसरी नेमतों से नवाज़ा है।)))