ख़ुत्बात  
  86- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें सिफ़ाते ख़ालिक़ ‘‘जल्ला जलालोहू’’ का ज़िक्र किया गया है और फिर लोगों को तक़वा की नसीहत की गई है।)


बेषक! वह पोषीदा इसरार का आलिम और दिलों के राज़ों से बाख़बर है, उसे हर “ौ पर अहाता हासिल है और वह हर “ौ पर ग़ालिब है और ताक़त रखने वाला है।


--मोअज़्मा--


तुम में से हर “ाख़्स का फ़र्ज़ है के मोहलत के दिनों में अमल करे क़ब्ल इसके के मौत हाएल हो जाए और फ़ुरसत के दिनों में काम करे क़ब्ल इसके के मषग़ूल हो जाए। अभी जबके सांस लेने का मौक़ा है क़ब्ल इसके के गला घोंट दिया जाए, अपने नफ़्स और अपनी मन्ज़िल के लिये सामान मुहय्या कर ले और इस कूच के घर से उस क़याम के घर के लिये ज़ादे राह फ़राहम कर ले।
लोगों! अल्लाह को याद रखो और उससे डरते रहो इस किताब के बारे में जिसका तुमको मुहाफ़िज़ बराया गया है और उन हुक़ूक़ के बारे में जिनका तुमको अमानतदार क़रार दिया गया है। इसलिये के उसने तुमको बेकार नहीं पैदा किया है और न महमिल छोड़ दिया है और न किसी जेहालत और तारीकी में रखा है। तुम्हारे आसार को बयान कर दिया है। आमाल को बता दिया है और मुद्दते हयात को लिख दिया है। वह किताब नाज़िल कर दी है जिसमें हर “ौ का बयान पाया जाता है और एक मुद्दत तक अपने पैग़म्बर को तुम्हारे दरम्यान रख चुका है। यहाँ तक के तुम्हारे लिये अपने इस दीन को कामिल कर दिया है जिसे इसने पसन्दीदा क़रार दिया है और तुम्हारे लिये पैग़म्बर (स0) की ज़बान से उन तमाम आमाल को पहुंचा दिया है जिनको वह दोस्त रखता है या जिनसे नफ़रत करता है। अपने अम्र व नवाही को बता दिया है और दलाएल तुम्हारे सामने रख दिये हैं और हुज्जत तमाम कर दी है और डराने धमकाने का इन्तज़ामक र दिया है और अज़ाब के आने से पहले ही होषियार कर दिया है लेहाज़ा अब जितने दिन बाक़ी रह गए हैं उन्हीं में तदारूक कर लो और अपने नफ़्स को सब्र आमादा कर लो के यह दिन अय्यामे ग़फ़लत के मुक़ाबले में बहुत थोडे़ हैं जब तुमने मौअज़ सुनने का भी मौक़ा नहीं निकाला, ख़बरदार अपने नफ़्स आज़ाद मत छोड़ो वरना यह आज़ादी तुमको ज़ालिमों के रास्ते पर ले जाएगी और इसके साथ नरमी न बरतो वरना यह तुम्हें मुसीबतों में झोंक देगा।
बन्दगाने ख़ुदा! अपने नफ़्स का सबसे सच्चा मुख़लिस वही है जो परवरदिगार का सबसे बड़ा इताअत गुज़ार है और अपने नफ़्स से सबसे बड़ा ख़यानत करने वाला वह है जो अपने परवरदिगार का मासियतकार है। ख़सारे में वह है जो ख़ुद अपने नफ़्स करे घाटे में रखे और क़ाबिले रष्क वह है जिसका दीन सलामत रह जाए। नेक बख़्त वह है जो दूसरों के हालात से नसीहत हासिल कर ले और बदबख़्त वह है जो ख़्वाहेषात के धोके में आ जाए।
याद रखो के मुख़्तसर सा “ााएबा रियाकारी भी एक तरह का षिर्क है और ख़्वाहिष परस्तों की सोहबत भी ईमान से ग़ाफ़िल बनाने वाली है और “ौतान को अलबत्ता सामने लाने वाली है। झूट से परहेज़ करो के वह ईमान से किनाराकष रहता है। सच बोलने वाला हमेषा निजात और करामत के किनारे रहता है और झूट बोलने वाला हमेषा तबाही और ज़िल्लत के दहाने पर रहता है। ख़बरदार एक दूसरे से हसद न करना ‘‘हसद ईमान को उस तरह खा जाता है जिस तरह आग सूखी लकड़ी को खा जाती है।’’ और आपस में एक दूसरे से बुग़्ज़ न रखना के बुग़़्ज़ ईमान का सफ़ाया कर देता है याद रखो के ख़्वाहिष अक़्ल को भुला देती है और ज़िक्रे ख़ुदा से ग़ाफ़िल बना देती है। ख़्वाहिषात को झुटलाओ के यह सिर्फ़ धोका हैं और इनका साथ देने वाला एक फ़रेब ख़ोरदा इन्सान है और कुछ नहीं है।


(((जब चाहें अहले दुनिया की महफ़िलों का जाएज़ा लें। दुनिया भर की महमिल बातें, खेल कूद के तज़किरे, सियासत के तबसिरे, लोगों की ग़ीबत, पाकीज़ा लोगों पर तोहमत, ताष के पत्ते, “ातरन्ज के मोहरे वग़ैरा नज़र आ जाएंगे तो क्या ऐसी महफ़िलों में मलाएका मुक़र्रबीन भी हाज़िर होंगे। यक़ीनन यह मक़ामात “ायातीन और ईमान से ग़फ़लत के मराहेल हैं जिनसे इजतेनाब हर मुसलमान का फ़रीज़ा है और इसके बग़ैर तबाही के अलावा कुछ नहीं है।)))