ख़ुत्बात  
  84- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें अम्र व आस का ज़िक्र किया गया है)


ताज्जुब है नाबग़ा के बेटे से, के यह अहले “ााम से बयान करता है के मेरे मिज़ाज में मिज़ाह पाया जाता है और मैं कोई खेल तमाषे वाला इन्सान हूँ और हंसी मज़ाक़ में लगा रहता हूँ। यक़ीनन इसने यह बात ग़लत ही कही है और इसकी बिना पर गुनहगार भी हुआ है। आगाह हो जाओ के बदतरीन कलाम ग़लतबयानी है और यह जब बोलता है तो झूट ही बोलता है और जब वादा करता है तो वह वादाखि़लाफ़ी ही करता है और जब उससे कुछ मांगा जाता है तो बुख़ल ही करता है और जब ख़ुद मांगता है तो चिमट जाता है। अहद व पैमान में ख़यानत करता है। क़राबतों में क़तअ रहम करता है। जंग के वक़्त देखो तो क्या क्या अम्र व नहीं करता है जब तक तलवारें अपनी मन्ज़िल पर ज़ोर न पकड़ लें। वरना जब ऐसा हो जाता है तो इसका सबसे बड़ा जरबा यह होता है के दुष्मन के सामने अपनी पुष्त को पेष कर दे। ख़ुदा गवाह है के मुझे खेल कूद से यादे मौत ने रोक रखा है और उसे हर्फ़े हक़ से निसयाने आख़ेरत ने रोक रखा है। इसने माविया की भी उस वक़्त तक नहीं की जब तक उससे यह तय नहीं कर लिया के उसे कोई हदिया देगा और उसके सामने तर्के दीन पर कोई तोहफ़ा पेष करेगा।