ख़ुत्बात  
  81-आपका इरषादे गिरामी
(ज़ोहद के बारे में)



अय्योहन्नास! ज़्ोहद उम्मीदों के कम करने, नेमतों का “ाुक्रिया अदा करने और मोहर्रमात से परहेज़ करने का नाम है। अब अगर यह काम तुम्हारे लिये मुष्किल हो जाए तो कम अज़ कम इतना करना के हराम तुम्हारी क़ूवते बरदाष्त पर ग़ालिब न आने पाए और नेमतों के मौक़े पर “ाुक्रिया को फ़रामोष न कर दुनिया के परवरदिगार ने निहायत दरजए वाज़े और रौषन दलीलों और हुज्जत तमाम करने वाली किताबों के ज़रिये तुम्हारे हर उज़्र का ख़ातमा कर दिया है।