ख़ुत्बात  
  80- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जंगे जमल से फ़राग़त के बाद औरतों की मज़म्मत के बारे में)



लोगों! याद रखो के औरतें ईमान के ऐतबार से, मीरास के हिस्से के ऐतबार से और अक़्ल के ऐतबार से नाक़िस होती हैं। ईमान के ऐतबार से नाक़िस होने का मतलब यह है के वह अय्यामे हैज़ में नमाज़ रोज़े से बैठ जाती हैं और अक़्लों के ऐतबार से नाक़िस होने का मतलब यह है के इनमें दो औरतों की गवाही एक मर्द के बराबर होती है। हिस्से की कमी यह है के उन्हें मीरास में हिस्सा मर्दों के आधे हिस्से के बराबर मिलता है। लेहाज़ा तुम बदतरीन औरतों से बचते रहो और बेहतरीन औरतों से भी होषियार रहो और ख़बरदार नेक काम भी इनकी इताअत की बिना पर अन्जाम न देना के उन्हें बुरे काम का हुक्म देने का ख़याल पैदा हो जाए।