ख़ुत्बात  
  73- आपका इरषादे गिरामी
(जो मरवान बिन अलहकम से बसरा में फ़रमाया)

कहा जाता है के जब मरवान बिन अलहकम जंग में गिरफ़्तार हो गया तो इमाम हसन (अ0) व हुसैन (अ0) ने अमीरूल मोमेनीन (अ0) से इसकी सिफ़ारिष की और आपने उसे आज़ाद कर दिया तो दोनों हज़रात ने अर्ज़ की के या अमीरूल मोमेनीन (अ0)! आपकी बैयत करना चाहता है तो आपने फ़रमाया-
क्या उसने क़त्ले उस्मान के बाद मेरी बैअत नहीं की थी ? मुझे इसकी बैअत की कोई ज़रूरत नहीं है, यह एक यहूदी क़िस्म का हाथ है, अगर हाथ से बैअत कर भी लेगा तो रकीक तरीक़े से इसे तोड़ डालेगा। याद रखो इसे भी हुकूमत मिलेगी मगर सिर्फ़ इतनी देर जितनी देर में कुत्ता अपनी नाक चाटता है। इसके अलावा यह चार बेटों का बाप भी है और उम्मते इस्लामिया इससे और इसकी औलाद से बदतरीन दिन देखने वाली है।