ख़ुत्बात  
  68- आपका इरषादे गिरामी
(जब आपने मोहम्मद बिन अबीबक्र को मिस्र की ज़िम्मेदारी हवाले की और उन्हें क़त्ल कर दिया गया)


मेरा इरादा था के मिस्र का हाकिम हाषिम बिन अतबा को बनाऊं अगर उन्हें बना देता तो हरगिज़ मैदान को मुख़ालेफ़ीन के लिये ख़ाली न छोड़ते और उन्हें मौक़े से फ़ायदा न उठाने देते (लेकिन हालात ने ऐसा न करने दिया)।
इस बयान का मक़सद मोहम्मद बिन अबीबक्र की मज़म्मत नहीं है इसलिये के वह मुझे अज़ीज़ था और मेरा ही परवरदा था।
(((उस्ताद अहमद हसन याक़ूब ने किताब नज़रियए अदालते सहाबा में एक मुफ़स्सिल बहस की है के सक़ीफ़ा में कोई क़ानून इज्तेमाअ इन्तख़ाब ख़लीफ़ा के लिये नहीं हुआ था और न कोई इसका एजेन्डा था और न सवा लाख सहाबा की बस्ती में से दस बीस हज़ार अफ़राद जमा हुए थे बल्कि सअद बिन अबादा की बीमारी की बिना पर अन्सार अयादत के लिये जमा हुए थे और बाज़ मुहाजेरीन ने इस इज्तेमाअ को देखकर यह महसूस किया के कहीं खि़लाफ़त का फ़ैसला न हो जाए, तो बरवक़्त पहुंचकर इस क़द्र हंगामा किया के अन्सार में फूट पड़ गई और फ़िल ज़ोर हज़रत अबूबक्र की खि़लाफ़त का एलान कर दिया और सारी कारवाई लम्हों में यूं मुकम्मल हो गई के सअद बिन अबादा को पामाल कर दिया गया और हज़रत अबूबक्र ‘‘ताजे खि़लाफ़त’’ सर पर रखे हुए सक़ीफ़ा से बरामद हो गए। इस “ाान से के इस अज़ीम मुहिम की बिना पर जनाज़ाए रसूल में षिरकत से भी महरूम हो गए और खि़लाफ़त का पहला असर सामने आ गया।
हाषिम बिन अतबा सिफ़फीन में अलमदारे लष्करे अमीरूल मोमेनीन थे। मिरक़ाल उनका लक़ब था के निहायत तेज़ रफ़तारी और चाबकदस्ती से हमला करते थे।
मोहम्मद बिन अबीबक्र अस्मार बिन्त ऐस के बत्न से थे जो पहले जनाबे जाफ़रे तैयार की ज़ौजा थीं और उनसे अब्दुल्लाह बिन जाफ़र पैदा हुए थे इसके बाद इनकी “ाहादत के बाद अबूबक्र की ज़ौजियत में आ गईं जिनसे मोहम्मद पैदा हुए और इनकी वफ़ात के बाद मौलाए कायनात की ज़ौजियत में आईं और मोहम्मद ने आपके ज़ेर असर तरबियत पाई यह और बात है के जब अम्र व आस ने चार हज़ार के लष्कर के साथ मिस्र पर हमला किया तो आपने आबाई उसूले जंग की बिना पर मैदान से फ़रार इख़्तेयार किया और बाला आखि़र क़त्ल हो गए और लाष को गधे की खाल में रख कर जला दिया गया या बरिवायते ज़िन्दा ही जला दिये गए और माविया ने इस ख़बर को सुनकर इन्तेहाई मसर्रत का इज़हार किया। (मरूजुल ज़हब)
अमीरूल मोमेनीन (अ0) ने इस मौक़े पर हाषिम को इसीलिये याद किया था के वह मैदान से फ़रार न कर सकते थे और किसी घर के अन्दर पनाह लेने का इरादा भी नहीं कर सकते थे।)))