ख़ुत्बात  
  67- आपका इरषादे गिरामी
(जब रसूले अकरम (स0) के बाद सक़ीफ़ा बनी सादह की ख़बरें पहुँचीं और आपने पूछा के अन्सार ने क्या एहतेजाज किया तो लोगों ने बताया के वह यह कह रहे थे के एक अमीर हमारा होगा और एक तुम्हारा- तो आपने फ़रमाया)


तुम लोगों ने उनके खि़लाफ़ यह इस्तेदलाल क्यों नहीं किया के रसूले अकरम (स0) ने तुम्हारे नेक किरदारों के साथ हुस्ने सुलूक और ख़ताकारों से दरगुज़र करने की वसीयत फ़रमाई है?
लोगों ने कहा के इसमें क्या इस्तेदलाल है?
फ़रमाया के अगर इमामत व इमारत इनका हिस्सा होती तो इनसे वसीयत की जाती न के इनके बारे में वसीयत की जाती। इसके बाद आपने सवाल किया के क़ुरैष की दलील क्या थी? लोगों ने कहा के वह अपने को रसूले अकरम (स0) के “ाजरे में साबित कर रहे थे। फ़रमाया के अफ़सोस “ाजरे से इस्तेदलाल किया और समरह को ज़ाया कर दिया।