ख़ुत्बात  
  61- आपने फ़रमाया


ख़बरदार मेरे बाद ख़ुरूज करने वालों से जंग न करना के हक़ की तलब में निकलकर बहक जाने वाला उसका जैसा नहीं होता है जो बातिल की तलाष में निकले और हासिल भी कर ले।
सय्यद रज़ी- आखि़री जुमले से मुराद माविया और इसके असहाब हैं।