ख़ुत्बात  
  53- आपके ख़ुत्बे का एक हिस्सा
(जिसमें रोज़े ईदुल अज़हा का तज़केरा है और क़ुरबानी के सिफ़ात का ज़िक्र किया गया है)


क़ुरबानी के जानवर का कमाल यह है के इसके कान बलन्द हों और आँखें सलामत हों के अगर कान और आँख सलामत हैं तो गोया क़ुरबानी सालिम और मुकम्मल है चाहे इसकी सींग टूटी हुई हो और वह पैरों को घसीट कर अपने को क़ुरबान गाह तक ले जाए।


सय्यद रज़ी- इस मक़ाम पर मन्सक से मुराद मज़नअ और क़ुरबानगाह है।