ख़ुत्बात  
  49- आपका इरषादे गिरामी
(जिसमें परवरदिगार के मुख़्तलिफ़ सिफ़ात और उसके इल्म का तज़किरा किया गया है)


सारी तारीफ़ें उस ख़ुदा के लिये हैं जो मख़फ़ी उमूर की गहराइयों से बाख़बर है और उसके वजूद की रहनुमाई ज़हूर की तमाम निषानियां कर रही हैं। वह देखने वालों की निगाह में आने वाला नहीं है लेकिन न किसी न देखने वाले की आँख उसका इन्कार कर सकती है और न किसी असबात करने वाले का दिल इसकी हक़ीक़त को देख सकता है। वह बुलन्दियों में इतना आगे है के कोई “ौ उससे बुलन्दतर नहीं है और क़ुरबत में इतना क़रीब है के कोई “ाय इससे क़रीबतर नहीं है। न इसकी बलन्दी उसे मख़लूक़ात से दूर बना सकती है और न इसकी क़ुरबत बराबर की जगह पर ला सकती है। इसने अक़लों को अपनी सिफ़तों की हुदूद से बाख़बर नहीं किया है और बक़द्रे वाजिब मारेफ़त से महरूम भी नहीं रखा है। वह ऐसी हस्ती है के इसके इनकार करने वाले के दिल पर इसके वजूद की निषानियां “ाहादत दे रही हैं। वह मख़लूक़ात से तषबीह देने वाले और इन्कार करने वाले दोनों की बातों से बलन्द व बालातर है।