ख़ुत्बात  
  47- आपका इरषादे गिरामी
(कूफ़े के बारे में)


ऐ कूफ़ा! जैसे के मैं देख रहा हूँ के तुझे बाज़ार अकाज़ के चमड़े की तरह खींचा जा रहा है। तुझ पर हवादिस के हमले हो रहे हैं और तुझे ज़लज़लों का मरकब बना दिया गया है और मुझे यह मालूम है के जो ज़ालिम व जाबिर भी तेरे साथ कोई बुराई करना चाहेगा परवरदिगार उसे किसी न किसी मुसीबत में मुब्तिला कर देगा और उसे किसी क़ातिल की ज़द पर ले आएगा।