ख़ुत्बात  
  42- आपका इरषादे गिरामी
(जिसमें इत्तबाअ ख़्वाहिषात और तूले अमल से डराया गया है)


अय्योहन्नास! मैं तुम्हारे बारे में सबसे ज़्यादा दो चीज़ों का ख़ौफ़ रखता हूँ। इत्तेबाअ ख़्वाहिषात और दराज़िये उम्मीद, के इत्तेबाअ ख़्वाहिषात इन्सान को राहे हक़ से रोक देता है और तूले अमल आख़ेरत को भुला देता है। याद रखो दुनिया मुंह फेरकर जा रही है और इसमें से कुछ बाक़ी नहीं रह गया है मगर उतना जितना बरतन से चीज़ को उण्डेल देने के बाद तह में बाक़ी रह जाता है और आखि़रत अब सामने आ रही है।
दुनिया व आख़ेरत दोनों की अपनी औलाद हैं। लेहाज़ा तुम आख़ेरत के फ़रज़न्दों में “ाामिल हो जाओ और ख़बरदार फ़रज़न्दाने दुनिया में “ाुमार न होना इसलिये के अनक़रीब हर फ़रज़न्द को इसके माल के साथ मिला दिया जाएगा। आज अमल की मंज़िल है और कोई हिसाब नहीं है और कल हिसाब ही हिसाब है और कोई अमल की गुंजाइष नहीं है।